Stock Market Crash: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली. सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही बिकवाली हावी हो गई और दिनभर निवेशकों में घबराहट का माहौल बना रहा. कारोबार के अंत तक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी50 दोनों प्रमुख सूचकांक 1.5 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर लाल निशान में बंद हुए. बाजार में आई इस तेज गिरावट के कारण निवेशकों को करीब 6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा. विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट संकट, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और लगातार महंगे होते कच्चे तेल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया आर्थिक बचत वाली अपील को लेकर भी बाजार में चर्चा तेज रही.
सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1312.91 अंकों यानी 1.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,015.28 पर बंद हुआ. वहीं एनएसई निफ्टी50 भी 360.30 अंक यानी 1.49 प्रतिशत टूटकर 23,815.85 पर पहुंच गया. दिन के दौरान सेंसेक्स 76,638.09 पर खुला था, लेकिन कारोबार बढ़ने के साथ बिकवाली तेज हो गई और यह 75,957.40 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया. दूसरी तरफ निफ्टी 23,970.10 पर खुलने के बाद गिरकर 23,799.10 तक पहुंच गया. व्यापक बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 1.05 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 1.13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट?
सेक्टरवार देखें तो सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में दर्ज की गई, जो 3.73 प्रतिशत टूट गया. इसके अलावा निफ्टी रियल्टी सूचकांक में 3.05 प्रतिशत की गिरावट आई. निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी ऑयल एंड गैस सूचकांक भी 2 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए. इसके अलावा निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी मेटल और निफ्टी प्राइवेट बैंक में भी भारी दबाव देखने को मिला. बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, तेल की कीमतों में तेजी का असर सबसे ज्यादा ऊर्जा, बैंकिंग और उपभोक्ता सेक्टर पर पड़ा है.
किन शेयरों में तेजी और गिरावट रही?
निफ्टी पैक में सबसे ज्यादा तेजी टाटा कंज्यूमर के शेयरों में देखने को मिली, जिसमें 8 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई. इसके बाद मैक्स हेल्थ के शेयरों में 2.7 प्रतिशत की तेजी रही. इसके अलावा कोल इंडिया, सन फार्मा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, ग्रासिम, ओएनजीसी, अदाणी पोर्ट्स और एसबीआई लाइफ के शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली. वहीं दूसरी तरफ टाइटन, इंडिगो, भारतीय स्टेट बैंक, इटरनल, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, भारती एयरटेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर सबसे ज्यादा टूटे और टॉप लूजर्स की सूची में शामिल रहे.
निवेशकों को 6 लाख करोड़ का नुकसान
शेयर बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा. बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले कारोबारी सत्र के 473.5 लाख करोड़ रुपए से घटकर करीब 467.5 लाख करोड़ रुपए रह गया. इस तरह निवेशकों को एक ही दिन में लगभग 6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा.
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
इस दौरान ब्रेंट क्रूड का मई फ्यूचर्स 2.12 प्रतिशत बढ़कर 103.4 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया. मार्केट एक्सपर्ट सुनील शाह ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि शेयर बाजार में आई गिरावट की वजह केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील नहीं है, बल्कि इसके पीछे पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतें सबसे बड़ा कारण हैं. उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह बाजार को उम्मीद थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा संकट जल्द खत्म हो जाएगा और सीजफायर के बाद कोई स्थायी समझौता हो सकता है. इसी उम्मीद में बाजार में तेजी का माहौल बनने लगा था और कच्चे तेल की कीमतें भी नीचे आने लगी थीं.
सुनील शाह ने आगे कहा कि पहले क्रूड ऑयल की कीमतें 115-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो बाद में 90 डॉलर के आसपास आ गईं. भारत की जीडीपी वृद्धि, कॉरपोरेट कमाई और अर्थव्यवस्था के कई अनुमान 65 से 75 डॉलर प्रति बैरल के क्रूड ऑयल दाम को ध्यान में रखकर बनाए गए थे. लेकिन अब लगातार तीसरे महीने तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और होर्मुज संकट के जल्द खत्म होने के संकेत भी नहीं मिल रहे हैं. इसी वजह से बाजार में घबराहट और अनिश्चितता बनी हुई है.
पीएम मोदी की अपील पर क्या बोले एक्सपर्ट?
एक्सपर्ट सुनील शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील का मकसद देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखना है. भारत अपनी जरूरत का करीब 70 से 75 प्रतिशत ऊर्जा आयात करता है. उन्होंने बताया कि सरकार चाहती है कि लोग पेट्रोल-डीजल का उपयोग सोच-समझकर करें और अनावश्यक विदेशी यात्राओं व सोने की खरीदारी को कुछ समय के लिए टालें. इससे डॉलर की बचत होगी, चालू खाता घाटा कम रहेगा और रुपए पर दबाव भी कम पड़ेगा.
उन्होंने आगे कहा कि अगर लोग गैर-जरूरी खर्च और ईंधन की बर्बादी कम करते हैं तो इसका फायदा देश की अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट सेक्टर, दोनों को मिलेगा. उनके मुताबिक बाजार की असली चिंता अभी भी कच्चे तेल की कीमतें हैं. अगर तेल फिर से 65-75 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में लौट आता है तो भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था के लिए यह बड़ा सकारात्मक संकेत होगा.
एपी शुक्ला ने क्या कहा?
मार्केट एक्सपर्ट एपी शुक्ला ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि जब देश का कोई बड़ा नेता गंभीर अपील करता है तो उसका असर स्वाभाविक रूप से बाजार और लोगों की सोच पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से एक साल तक सोने की खरीदारी टालने, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और वैकल्पिक ऊर्जा की ओर बढ़ने की अपील की है. एपी शुक्ला ने बताया कि भारत हर साल बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और सोना आयात करता है, जिसके लिए भारी मात्रा में डॉलर खर्च होते हैं.
उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद डॉलर के मुकाबले रुपए में काफी कमजोरी आई है और सोने की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं. भारत हर साल लगभग 700-800 टन सोना आयात करता है, जबकि कच्चे तेल पर भी भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है. उन्होंने कहा कि सोना एक अच्छा एसेट क्लास जरूर है, लेकिन ज्यादातर सोना लॉकरों में बंद रहता है और उसका अर्थव्यवस्था में सक्रिय उपयोग नहीं होता. इसके विपरीत, अगर वही पैसा अर्थव्यवस्था में घूमता रहे तो उससे विकास और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं.
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