Sugar Price Today: त्योहारों का सीजन जैसे-जैसे करीब आ रहा है, वैसे-वैसे चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. चीनी के दाम कम होने के बजाय लगातार ऊपर जा रहे हैं. मंगलवार को खुदरा बाजार में चीनी की कीमत करीब एक रुपये बढ़कर 64 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई. इससे एक दिन पहले सोमवार को चीनी का औसत खुदरा भाव 63.05 रुपये प्रति किलो था.
एक महीने में 31 फीसदी महंगी हुई चीनी
उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 25 अगस्त को चीनी का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 63.97 रुपये प्रति किलो रहा. एक महीने पहले चीनी की औसत कीमत 48.81 रुपये प्रति किलो थी. इस हिसाब से एक महीने में चीनी के दाम करीब 31 फीसदी बढ़ चुके हैं. वहीं, पिछले साल अगस्त की तुलना में भी चीनी काफी महंगी हो गई है. एक साल पहले इसी अवधि में चीनी का औसत भाव 46.31 रुपये प्रति किलो था. यानी पिछले साल के मुकाबले इस बार कीमत करीब 38 फीसदी ज्यादा है.
उपलब्ध आंकड़ों के हवाले से न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि सोमवार को चीनी का अधिकतम बिक्री मूल्य 76 रुपये प्रति किलो था, जबकि इसकी ‘मॉडल दर’ 65 रुपये प्रति किलोग्राम थी. हालांकि, सरकार और चीनी उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में मिल स्तर पर चीनी के भाव में गिरावट आई है. लेकिन इसका असर अभी खुदरा बाजार में नजर नहीं आया है.
थोक बाजार में भी महंगी, लेकिन मिल भाव में आई गिरावट
आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को चीनी का थोक भाव 59.23 रुपये प्रति किलो रहा. एक महीने पहले यही कीमत 45.35 रुपये प्रति किलो थी, जबकि एक साल पहले चीनी का थोक भाव 43.01 रुपये प्रति किलो था. इससे पहले सोमवार को खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया था कि सरकार की ओर से चीनी के आयात की अनुमति देने और सट्टेबाजी व जमाखोरी पर रोक लगाने के फैसलों के बाद मिल स्तर पर चीनी का भाव 18% घटकर 55 रुपये प्रति किलो रह गया है. पिछले सप्ताह मिल स्तर पर चीनी का भाव रिकॉर्ड 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था. अब इसमें गिरावट आने के बावजूद खुदरा बाजार में इसका असर अभी पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है.
बढ़ती कीमतों पर सरकार ने क्या कदम उठाए?
आम जनता को राहत देने और चीनी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं. सरकार ने बिना ड्यूटी चीनी के आयात को मंजूरी दी है. लंबे समय बाद 10 लाख मीट्रिक टन यानी 10 LMT कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी गई है. इसका उद्देश्य देश में चीनी की सप्लाई बढ़ाना है. इसके अलावा सरकार ने चीनी के स्टॉक की सीमा भी तय की है. चीनी डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट निर्धारित की गई है. वहीं, 1 सितंबर से बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं, जैसे बेकरियों और हलवाइयों को 15 दिनों से ज्यादा की खपत का चीनी स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी.
जमाखोरी और कालाबाजारी पर भी निगरानी
चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमें मिलों में जाकर चीनी के स्टॉक का भौतिक सत्यापन यानी Physical Verification भी कर रही हैं. सरकार की ओर से उठाए जा रहे इन कदमों का उद्देश्य बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना, जमाखोरी पर रोक लगाना और बढ़ती कीमतों से आम लोगों को राहत देना है.
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