ऑनलाइन खाना मंगाने वालों को मिल सकती है राहत, Swiggy-Zomato के डिलीवरी चार्ज पर घटेगा GST

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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अगर आप घर बैठे Swiggy या Zomato से खाना ऑर्डर करते हैं, तो 8 अक्टूबर का दिन आपके लिए अहम हो सकता है. GST काउंसिल की बैठक में ऑनलाइन फूड डिलीवरी से जुड़े टैक्स को लेकर बड़ा फैसला होने की उम्मीद है. सबसे ज्यादा चर्चा डिलीवरी चार्ज पर लगने वाले GST को लेकर है. फिलहाल डिलीवरी फीस पर 18% GST लिया जाता है, जिसे घटाकर 5% करने का प्रस्ताव विचाराधीन है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो ऑनलाइन खाना मंगाने पर ग्राहकों के कुल बिल में कुछ राहत मिल सकती है. हालांकि, अंतिम फैसला GST काउंसिल की बैठक में ही होगा.

डिलीवरी चार्ज पर घट सकता है GST

फिलहाल ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म से खाना मंगाने पर खाने की कीमत पर 5% GST लगता है. वहीं, डिलीवरी फीस को अलग सेवा के तौर पर माना जाता है और उस पर 18 प्रतिशत GST लगाया जाता है. अब GST काउंसिल इस व्यवस्था में बदलाव पर विचार कर रही है. प्रस्ताव के मुताबिक, अगर डिलीवरी चार्ज पर GST की दर 18 प्रतिशत से घटाकर 5% कर दी जाती है, तो Swiggy और Zomato जैसे प्लेटफॉर्म से खाना ऑर्डर करने वाले ग्राहकों को राहत मिल सकती है. इससे डिलीवरी चार्ज पर लगने वाले टैक्स की दर खाने पर लगने वाले GST के बराबर हो जाएगी.

ग्राहकों के लिए कैसे बदल सकता है बिल?

डिलीवरी चार्ज पर टैक्स कम होने का सीधा असर ऑनलाइन फूड ऑर्डर के अंतिम बिल पर पड़ सकता है. मौजूदा व्यवस्था में डिलीवरी फीस पर ज्यादा GST लगने के कारण ग्राहक को अतिरिक्त टैक्स चुकाना पड़ता है. यदि 5 प्रतिशत GST का प्रस्ताव मंजूर होता है, तो इसी हिस्से पर लगने वाला टैक्स कम हो जाएगा. हालांकि, ग्राहकों को कितनी वास्तविक बचत होगी, यह डिलीवरी चार्ज और प्लेटफॉर्म की अन्य फीस पर निर्भर करेगा. GST दर में बदलाव होने के बाद ही इसका वास्तविक असर स्पष्ट होगा.

होटल-रेस्टोरेंट कारोबारियों को भी मिल सकती है राहत

GST काउंसिल की बैठक में सिर्फ ऑनलाइन फूड डिलीवरी से जुड़े प्रस्ताव पर ही चर्चा नहीं होनी है. होटल, रेस्टोरेंट और फिटनेस सेंटर जैसे कारोबारों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC से जुड़े प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है. फिलहाल 5 प्रतिशत GST की व्यवस्था के तहत काम करने वाले इन सर्विस प्रोवाइडर्स को कुछ इनपुट खर्चों पर टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलता. अब कुछ इनपुट पर ITC की सुविधा देने की संभावना पर चर्चा हो रही है. अगर बदलाव को मंजूरी मिलती है, तो कारोबारियों की लागत कम करने में मदद मिल सकती है.

दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर भी राहत संभव

हेल्थकेयर सेक्टर के लिए भी GST काउंसिल की बैठक अहम हो सकती है. दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं को लेकर टैक्स राहत का प्रस्ताव सामने है. सात और दुर्लभ बीमारियों को GST छूट वाली सूची में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है. प्रस्ताव मंजूर होने की स्थिति में इन बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जीवनरक्षक और महंगी दवाओं पर मरीजों और उनके परिवारों का आर्थिक बोझ कम हो सकता है.

डिफेंस और एग्रीकल्चर से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल

बैठक के एजेंडे में डिफेंस सेक्टर से जुड़े कुछ टैक्स प्रस्ताव भी शामिल हैं. मिसाइल के पुर्जों, स्पेयर पार्ट्स और विशेष टेस्टिंग उपकरणों को IGST से छूट देने पर विचार किया जा सकता है. इसके अलावा कृषि क्षेत्र के लिए भी राहत का प्रस्ताव है. कृषि बीजों की स्टोरेज और वेयरहाउसिंग सेवाओं को GST से मुक्त करने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है.

इससे कृषि से जुड़े भंडारण और लॉजिस्टिक्स की लागत पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा विदेशी शिपिंग कंपनियों को दी जाने वाली कुछ सेवाओं को लेकर भी टैक्स राहत के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है. वहीं, सीमन्स प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (SPFO) की सेवाओं से जुड़े टैक्स प्रावधानों में राहत देने पर भी चर्चा होने की संभावना है.

8 अक्टूबर को होगी GST काउंसिल की बैठक

GST काउंसिल की 57वीं बैठक 8 अक्टूबर को होने वाली है. फिलहाल Swiggy-Zomato की डिलीवरी फीस, ITC, दुर्लभ बीमारियों की दवाओं, डिफेंस उपकरणों और कृषि से जुड़ी सेवाओं को लेकर सामने आए ये सभी प्रस्ताव विचाराधीन हैं. इन पर अंतिम फैसला बैठक में लिए जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी. मंजूरी मिलने वाले प्रस्तावों को लागू करने के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा.

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