Tata Motors News: जगुआर लैंड रोवर में बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी, UK में 4,000 कर्मचारियों पर गिरेगी गाज

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Tata Motors News: टाटा मोटर्स के मालिकाना हक वाली कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) बड़े पैमाने पर छंटनी करने की तैयारी में है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अगले दो सालों में यूके में करीब 4,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की योजना बना रही है. यह छंटनी मुख्य रूप से मैनेजमेंट और सैलरीड स्टाफ के स्तर पर की जाएगी. कंपनी का उद्देश्य मैनेजमेंट का आकार छोटा करने के साथ ऑपरेटिंग कॉस्ट को कम करना है. इसके लिए JLR स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (Voluntary Redundancy) कार्यक्रम भी शुरू कर रही है.

यूके के अखबार ‘द टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों की छंटनी की यह योजना JLR की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी करीब 1.7 बिलियन यूरो यानी लगभग 21,700 करोड़ रुपये की बचत करना चाहती है. इसके साथ ही कंपनी अपने बिजनेस मॉडल को आसान बनाकर ब्रेक-ईवन पॉइंट को घटाकर सालाना 3,00,000 वाहनों पर लाना चाहती है. ब्रेक-ईवन पॉइंट वह स्तर होता है, जहां कंपनी की लागत और कमाई बराबर हो जाती है. इसका मतलब है कि कंपनी कम गाड़ियां बेचकर भी अपनी लागत निकालकर मुनाफे की स्थिति में पहुंच सकेगी.

मौजूदा कर्मचारियों पर क्या होगा असर?

ब्रिटेन में JLR के पास 33,000 से अधिक प्रत्यक्ष कर्मचारी हैं. इसके अलावा कंपनी अपनी सप्लाई चेन के जरिए करीब 1,20,000 लोगों को रोजगार देती है. हालांकि, कंपनी ने साफ किया है कि प्रस्तावित छंटनी से फैक्ट्रियों में प्रति घंटे के आधार पर काम करने वाले मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली लाइन कर्मचारियों पर असर नहीं पड़ेगा.

छंटनी का मुख्य फोकस मैनेजमेंट को छोटा और अधिक लचीला बनाने पर होगा. इससे कंपनी को सैलरी और ऑफिस मेंटेनेंस जैसे फिक्स्ड कॉस्ट को कम करने में मदद मिलेगी. कंपनी की इस रणनीति का एक बड़ा मकसद बाजार में मांग घटने की स्थिति में भी लागत को नियंत्रित रखना है. अगर वैश्विक मंदी या अमेरिकी टैरिफ की वजह से JLR की गाड़ियों की मांग कम होती है, तो कंपनी कम वाहनों की बिक्री के बावजूद अपनी लागत वसूलने की स्थिति में रह सकेगी.

अमेरिकी टैरिफ ने बढ़ाई JLR की मुश्किल

अमेरिका JLR का सबसे बड़ा ग्लोबल मार्केट है और कंपनी की कुल बिक्री में इसकी हिस्सेदारी 29% है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ब्रिटेन में निर्मित यात्री वाहनों के आयात पर 10% का नया आयात शुल्क लगाने की घोषणा के बाद JLR के मुनाफे और बिक्री पर सीधा दबाव पड़ा है. अमेरिका और यूके के बीच हुए समझौते के तहत पहले सालाना 1,00,000 वाहनों पर 10% का रियायती शुल्क लागू होता है.

हालांकि, यह कोटा पार होने के बाद ब्रिटिश कारों पर 27.5% का भारी टैक्स लागू हो जाता है. ऐसे में अमेरिका को ब्रिटिश कारों का निर्यात करना कंपनी के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है. JLR की लोकप्रिय SUV ‘डिफेंडर’ भी कंपनी की मुश्किलें बढ़ा रही है. इसकी मैन्युफैक्चरिंग स्लोवाकिया में होती है. स्लोवाकिया यूरोपीय संघ (EU) का हिस्सा है, लेकिन दिए गए विवरण के मुताबिक इस मॉडल को अमेरिका-यूके समझौते के 10% रियायती कोटे का लाभ नहीं मिलता. इससे JLR के लिए अमेरिकी बाजार में अपनी कारों की बिक्री और निर्यात को लेकर चुनौतियां और बढ़ गई हैं.

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