Global Market Crash: 7 अप्रैल 2026 की सुबह वैश्विक शेयर बाजारों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा ईरान को दी गई कड़ी और विनाशकारी चेतावनी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया. इस बयान के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला और कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई. तेल की इस तेजी ने बाजारों में घबराहट और अनिश्चितता को और बढ़ा दिया.
तेल की आग से बाजारों में मचा हड़कंप
तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. निवेशकों को डर है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ सकता है. ऊर्जा कीमतों में उछाल का सीधा असर उन देशों पर पड़ रहा है जो तेल के बड़े आयातक हैं, और इसमें भारत जैसे देश सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं.
भारतीय बाजार में ‘ब्लैक ट्यूसडे’ जैसा माहौल
भारत में शेयर बाजार की शुरुआत बेहद खराब रही. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही करीब 1 प्रतिशत की गिरावट के साथ खुले, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 73,326 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी भी गिरकर 22,771 के आसपास पहुंच गया. कुछ ही मिनटों में निवेशकों के लगभग 4 लाख करोड़ रुपये डूब गए, जिससे बाजार में हड़कंप मच गया.
विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली और महंगे होते तेल ने बाजार की स्थिति को और कमजोर कर दिया. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेज गिरावट देखी गई, जिससे छोटे निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ.
एशियाई बाजारों पर भी पड़ा सीधा असर
अमेरिका-ईरान तनाव का असर एशियाई बाजारों पर भी साफ नजर आया. जापान का प्रमुख सूचकांक निक्केई 225 गिरावट के साथ नीचे आ गया. जापान जैसे देश, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए तेल की बढ़ती कीमतें बड़ा झटका साबित हो रही हैं.
वहीं हांगकांग का हांगसेंग इंडेक्स भी गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट एक तरह की ‘चेन रिएक्शन’ है, जहां एक क्षेत्र में तनाव का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ रहा है.
चीन ने दिखाई स्थिरता, यूरोप दबाव में
वैश्विक उथल-पुथल के बीच चीन का बाजार अपेक्षाकृत स्थिर नजर आया. शंघाई कंपोजिट इंडेक्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जो इस बात का संकेत है कि चीन ने अपनी घरेलू नीतियों और ऊर्जा प्रबंधन के जरिए दबाव को कुछ हद तक संभाल लिया है. दूसरी ओर यूरोप के बाजार दबाव में रहे. जर्मनी का प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि लंदन का बाजार हल्की बढ़त बनाए रखने में सफल रहा.
अमेरिकी बाजार में भी अनिश्चितता
अमेरिकी बाजारों में भी ट्रंप के बयान का असर दिखाई देने लगा है. हालांकि डाउ जोंस और एसएंडपी 500 ने कुछ मजबूती बनाए रखी, लेकिन निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो अमेरिकी बाजार भी बड़ी गिरावट का सामना कर सकते हैं.
आगे क्या? निवेशकों की बढ़ी चिंता
मौजूदा हालात में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह तनाव और बढ़ेगा या कूटनीतिक स्तर पर समाधान निकलेगा. अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो न केवल तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ सकता है. निवेशक फिलहाल सतर्क हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं. आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान संबंधों पर निर्भर करेगी.
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