हाईकोर्ट से आसाराम को नहीं मिली राहत: नाबालिग से यौन उत्पीड़न मामले में उम्रकैद बरकरार, अब करना होगा सरेंडर

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Asaram Rape Case: स्वयंभू बाबा आसाराम की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. नाबालिग से दुष्कर्म मामले में सजा काट रहे बाबा आसाराम को कोर्ट से बड़ा झटका मिला है और कोर्ट ने उसे फौरन सरेंडर करने के लिए कहा है. मालूम हो कि आसाराम इस समय पैरोल पर जेल से बाहर निकला हुआ था, लेकिन कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई के बाद उसे फौरन सरेंडर करने का आदेश दिया हैं.

कोर्ट ने बरकरार रखी आजीवन कारावास की सजा

राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने आसाराम के आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है. हालांकि, उसकी सजा में गैंगरेप के चार्ज हटा दिए गए हैं. अन्य गंभीर आरोपों में दोषसिद्धि और सजा को पहले के जैसा ही रखा है. कोर्ट का आदेश है कि आसाराम तत्काल सरेंडर करे.

जाने क्या है पूरा मामला?

नाबालिग यौन उत्पीड़न मामले में राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने आज बड़ा फैसला सुनाते हुए स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम  को सुनाई गई उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है. हालांकि अदालत ने उसे गैंगरेप के आरोप से राहत प्रदान की है. वहीं, मामले में सह-आरोपी शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता और शरतचंद को बरी कर दिया गया.

राजस्थान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित शामिल थे, ने यह फैसला सुनाया. अदालत ने अंतिम बहस पूरी होने के बाद 20 अप्रैल 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया था. यह मामला वर्ष 2013 का है, जब उत्तर प्रदेश की एक नाबालिग छात्रा ने आरोप लगाया था कि जोधपुर स्थित आश्रम में उसके साथ यौन शोषण किया गया. इसके बाद देशभर में मामला सुर्खियों में आ गया था.

जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को दोषी मानते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. अदालत ने सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को भी 20-20 साल के कठोर कारावास की सुनाई थी. ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए तीनों आरोपियों ने राजस्थान हाई कोर्ट में अपील दायर की थी. हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान शिल्पी और शरतचंद को जमानत पर रिहा कर दिया था, जबकि आसाराम जोधपुर सेंट्रल जेल में ही बंद रहा.

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया था कि मामले में गैंगरेप और मानव तस्करी जैसे आरोप साबित नहीं होते हैं तथा कई महत्वपूर्ण साक्ष्य अभियोजन के दावों का समर्थन नहीं करते.

वहीं अभियोजन पक्ष ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि पीड़िता के बयान और अन्य साक्ष्य आरोपी के खिलाफ पर्याप्त हैं. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में मुख्य आरोपी आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा, लेकिन गैंगरेप से जुड़े आरोपों में राहत दी. अदालत ने सह-आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए जाने पर उन्हें दोषमुक्त कर दिया.

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