Iran Violent Protests: ईरान में लगातार हालात खराब होते जा रहे हैं. खराब होती आर्थिक स्थिति की वजह से देशभर में भड़के विरोध-प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 15 लोगों की जान जा चुकी हैं. अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) ने इस बारे में जानकारी दी है. संगठन के मुताबिक, ईरान के 31 प्रांतों में से 25 प्रांतों के 170 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हो रहे हैं. मरने वालों की संख्या 15 तक पहुंच गई है, जबकि 580 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
दंगाइयों के साथ बात करने का कोई फायदा नहीं
सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने ईरान में जारी हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बीच पहली बार बयान दिया है. उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से बात की जा सकती है, लेकिन दंगाइयों के साथ बात करने का कोई फायदा नहीं है और उन्हें उनकी जगह दिखानी होगी. 86 वर्षीय खामेनेई का यह बयान साफ संकेत है कि ईरान की सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का मन बना चुकी है. उन्होंने यह भी कहा कि हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के पीछे इजरायल और अमेरिका जैसी विदेशी ताकतें हैं.
अयातुल्ला अली खामेनेई से इतर राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शुरू में विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सुलह वाला रुख अपनाया था, लेकिन सरकार की ओर से अब सख्ती के संकेत मिल हैं. यहां कई शहरों में पुलिस स्टेशनों में आगजनी हुई है. कई स्थानों से गोलीबारी की खबर भी सामने आई है.
ग्रामीण इलाकों तक पहुंची ईरान में शुरु हुए प्रदर्शनों की आग
ईरान में शुरू हुए प्रदर्शनों की आग ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गई है. प्रदर्शन जारी हैं और इनमें तेजी आती दिख रही है. ये 2022 में महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद हुए देशव्यापी आंदोलन के बाद सबसे बड़े विरोध-प्रदर्शन हैं. तेहरान और दूसरे शहरों में प्रदर्शनकारी सड़कों आ गए हैं. लोग ‘तानाशाह की मौत हो’ जैसे नारे लगाते हुए अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं.
ईरान को ट्रंप ने दी है चेतावनी
मालूम हो कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा करता है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा. ईरान ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसे पता है कि हमला कहां करना है. यह सब ऐसे समय में हुआ, जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया है. मादुरो ईरान के लंबे समय से सहयोगी रहे हैं. ईरान में महंगाई, रियाल की रिकॉर्ड गिरावट और बुनियादी जरूरतों की बढ़ती कीमतों ने लोगों के गुस्से को भड़काया है. यह आंदोलन अब सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है.