Iran US Tension: अमेरिका और ईरान के तनाव के बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रंप के सामने सरेंडर करने से मना कर दिया है. सुप्रीम लीडर अमेरिका से आखिर तक लड़ने के लिए तैयार हैं. मिडिल ईस्ट में युद्ध के बढ़ते खतरे को देखते हुए अयातुल्ला अली खामेनेई ने अपने उत्तराधिकारी की घोषणा कर दी है. अयातुल्ला अली खामेनेई ने फैसले लेने का सारा अधिकार अपने उत्तराधिकारी को ट्रांसफर कर कर दिए हैं. इसी तरह कई सिक्योरिटी लेयर बनाई गई हैं, जो युद्ध के समय अमेरिका के खिलाफ फैसले ले सकती हैं.
दरअसल, अमेरिका ने दुनिया की सबसे ताकतवर मिलिट्री का फायदा उठाते हुए ईरान के खिलाफ कई प्लान बनाए हैं. इस बीच, ईरान के सुप्रीम लीडर ने न झुकने की कसम नहीं खाई है और किसी भी हालात के लिए तैयार हैं. इसीलिए सुप्रीम लीडर ने अली लारीजानी को अपना वारिस चुना है और अपनी सारी पावर उन्हें दे दी हैं. यदि जंग के दौरान सुप्रीम लीडर के साथ कुछ अनहोनी होती है या कॉन्टैक्ट टूट जाता है, तो सारे फैसले उनके वारिस अली लारीजानी लेंगे.
जाने कौन हैं अली लारीजानी
अली लारीजानी अभी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के हेड हैं और उन्हें इंटरनेशनल स्ट्रेटेजिक सर्कल में एक असरदार पॉलिसीमेकर माना जाता है. कई इंटरनेशनल रिपोर्ट्स का दावा है कि अगस्त 2025 में इस पद पर उनकी नियुक्ति के बाद से उन्होंने ईरान की सिक्योरिटी और मिलिट्री तैयारियों को इतना मजबूत कर दिया है कि US ने तेहरान पर सीधे हमले का खतरा बढ़ा दिया है.
IRGC से की करियर शुरुआत
लारीजानी का पॉलिटिकल और एडमिनिस्ट्रेटिव करियर लंबा रहा है. उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में कमांडर के तौर पर अपना करियर शुरू किया था. 1994 में उन्हें इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) का हेड बनाया गया था. 2004 में, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने उन्हें सलाहकार बनाया, जिससे उनकी पॉलिटिकल हैसियत और मजबूत हुई.
उन्होंने 2005 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी चुनाव लड़ा था. हालांकि, वे हार गए थे. उन्हें 2024 के इलेक्शन के लिए डिसक्वालिफाई कर दिया गया था. लारीजानी एक जाने-माने शिया धार्मिक परिवार से आते हैं. उनके पिता अयातुल्ला मिर्जा हाशिम अमोली ईरान में एक असरदार मौलवी थे. उनके पास कंप्यूटर साइंस और मैथ में बैचलर डिग्री और PHD है, जिससे वे टेक्निकली एक जानकार पॉलिटिशियन बन गए.