ईरान युद्ध से पाकिस्तान पस्त: पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए बढ़ाई सख्ती

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Pakistan battered by the Iran war: ईरान-अमेरिका के बीच समझौता न हो पाने की वजह से पैदा हुई अनिश्चितता के बीच शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान में लागू देशव्यापी मितव्ययिता अभियान को 13 जून 2026 तक बढ़ा दिया है. पाकिस्तान सरकार ने यह फैसला नाजुक युद्धविराम की स्थिति और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर को देखते हुए लिया है.

जाने क्या है मितव्ययिता अभियान?

मितव्ययिता अभियान का मतलब होता है खर्चों में कटौती कर संसाधनों को बचाने की कोशिश करना. जब किसी देश की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता है, ईंधन या जरूरी चीजों की कमी होती है, या सरकार वित्तीय संकट से जूझ रही होती है, तब सरकार ऐसे कदम उठाती है.

पाकिस्तान सरकार ने पहली बार 9 मार्च को कई सख्त आर्थिक और ईंधन बचत उपायों की घोषणा की थी. यह कदम अमेरिका और इस्राइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमले और उसके बाद ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की वजह से उठाया गया था. शुरुआती तौर पर ये मितव्ययिता उपाय दो महीनों के लिए लागू किए गए थे.

पाकिस्तान सरकार के कैबिनेट डिवीजन की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में कहा गया कि ईंधन संरक्षण और अतिरिक्त मितव्ययिता उपायों की निगरानी करने वाली समिति की सिफारिशों पर विचार करने के बाद प्रधानमंत्री ने इन उपायों की अवधि 13 जून 2026 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है. यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है.

सरकार द्वारा लागू प्रमुख उपायों में सरकारी वाहनों के लिए ईंधन भत्ते में 50 प्रतिशत की कटौती शामिल है. हालांकि, एंबुलेंस और सार्वजनिक बसों जैसे परिचालन वाहनों को इससे छूट दी गई है. इसके अलावा 60 प्रतिशत सरकारी वाहनों को बंद रखने और जरूरी राष्ट्रीय हितों से जुड़े मामलों को छोड़कर विदेशी दौरों पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला भी जारी रहेगा.

पाकिस्तान पश्चिम एशिया से आने वाली तेल आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर है. ईरान युद्ध के चलते देश की प्रमुख सप्लाई लाइन प्रभावित हुई, जिससे सामान्य प्रशासनिक और आर्थिक गतिविधियां चलाना मुश्किल हो गया है.

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