राम मंदिर दान घोटाला: मोहन भागवत ने कहा- हर पापी को मिले सख्त सजा, बच्चों के डिप्रेशन पर जताई चिंता

Ved Prakash Sharma
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Mohan Bhagwat Statement: अयोध्या के राम मंदिर में दान पेटी से हुई चोरी मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. अब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सीधी हुंकार भरी है. उन्होंने साफ कह दिया है कि इस महापाप के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.

रविवार को नागपुर में मीडिया के सामने भागवत ने कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने अलग से कोई घुमावदार बात नहीं की. भागवत ने सीधे तौर पर संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के बड़े बयान को आगे कर दिया. उन्होंने दो टूक कहा, ‘कल ही दत्तात्रेय होसबाले जी ने इस पर पूरा बयान जारी किया है, आप सब उसे ही देखें.’

रामलला के दरबार में हुई इस हेराफेरी को अत्यंत निंदनीय

होसबाले ने रामलला के दरबार में हुई इस हेराफेरी को अत्यंत निंदनीय बताया है. होसबाले ने कहा कि पीढ़ियों के खून-पसीने, संघर्ष और बलिदान से यह भव्य मंदिर बना है. यह पूरे हिंदू समाज की अटूट आस्था का केंद्र है. रामलला की दान पेटी पर हाथ साफ करने वालों ने सिर्फ पैसा नहीं चुराया, बल्कि करोड़ों रामभक्तों के भरोसे का कत्ल किया है. इस नीच हरकत से पूरा समाज गहरे सदमे और गुस्से में है.

अब तक जांच में क्या?

मामला बिगड़ा तो उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को तुरंत मैदान में उतरना पड़ा. राम जन्मभूमि ट्रस्ट की गुहार पर एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई गई. एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच की और 25 जून को केस दर्ज कर लिया. इस मामले में अब तक आठ आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है. जांच की आंच इतनी तेज थी कि इसके लपेटे में बड़े नाम आ गए. नैतिक जिम्मेदारी का हवाला देकर ट्रस्ट के सर्वेसर्वा चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने तुरंत अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाने के लिए एसआईटी को 15 दिनों की और मोहलत दे दी है. संघ ने अब सीधे ट्रस्ट को चेताया है कि वह अपनी पूरी तिजोरी और प्रशासन के ढीले पेंच कसे. साथ ही भक्तों से संयम रखने की अपील की है, ताकि देश विरोधी ताकतें इस दुखद घटना का फायदा न उठा सकें.

मोबाइल स्क्रीन और अकेलेपन ने बच्चों को किया मानसिक बीमार

इस गर्मागर्म विवाद के बीच भागवत नागपुर में ‘सन्मार्ग माइंड वेलनेस’ केंद्र के उद्घाटन में पहुंचे थे. वहां उन्होंने नई पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य और डिप्रेशन पर एक बेहद डरावना सच सामने रखा. भागवत ने चेतावनी दी कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम और परिवारों में बुजुर्गों के मार्गदर्शन की कमी की वजह से हमारे बच्चे मानसिक रूप से बेहद कमजोर और नाजुक हो रहे हैं.

मोहन भागवत ने आगे कहा कि 12वीं में फेल हुए तो आत्महत्या कर ली, घर में डांट पड़ी तो भाग गए या कुछ खौफनाक कदम उठा लिया. बच्चों का दिमाग इस हालत में कैसे पहुंचा? भागवत ने इसके लिए सीधे तौर पर माता-पिता की व्यस्तता और बच्चों को बचपन से मोबाइल थमा देने की आदत को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि आज घरों से दादी-नानी की कहानियां गायब हैं, जो कभी पांडवों के संघर्ष जैसी कहानियों से बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाती थीं. नई पीढ़ी अकेलेपन से जूझ रही है, उन्हें संवाद की जरूरत है. अगर वे भटक रहे हैं, तो यह बड़ों की नाकामी है.

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