Crime in Saudi Arabia: मौत की सजा को लेकर सऊदी अरब में नया विवाद सामने आया है. ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) के मुताबिक, सऊदी अधिकारियों ने 17 अक्टूबर को हसन जकी अल-फराज को फांसी दे दी. संगठन का कहना है कि जिन अपराधों के लिए उसे दोषी ठहराया गया, उनमें से कुछ कथित तौर पर उसने किशोरावस्था में किए थे. इस मामले ने सऊदी अरब में नाबालिगों के कथित अपराधों के लिए मृत्युदंड दिए जाने पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं. मानवाधिकार संगठन ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के लिहाज से गंभीर मामला बताया है.
ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, हसन अल-फराज को 27 नवंबर 2017 को गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि उसने शिया अल्पसंख्यकों के साथ कथित भेदभाव और उनके साथ किए जा रहे व्यवहार के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था. उस पर आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत आरोप लगाए गए. संगठन के मुताबिक, आरोपों में ऐसी गतिविधियां भी शामिल थीं, जो उसने 14 साल की उम्र में की थीं. 3 नवंबर 2022 को उसे मौत की सजा सुनाई गई थी. HRW का आरोप है कि पूछताछ के दौरान हसन को यातना दी गई और उससे जबरन कबूलनामा करवाया गया.
संगठन ने यह भी कहा कि उसे निष्पक्ष सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं मिला. ये आरोप मानवाधिकार संगठन की ओर से लगाए गए हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच ने बताया कि सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने यूसुफ अल-मनासिफ की मौत की सजा भी बरकरार रखी है. उसे उन अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया, जो कथित तौर पर उसने 15 से 16 साल की उम्र के दौरान किए थे. इस फैसले के बाद यूसुफ पर भी मृत्युदंड का खतरा बना हुआ है. संगठन के अनुसार, कम से कम तीन अन्य लोग भी ऐसे हैं, जिन्हें किशोरावस्था में किए गए कथित अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई गई है और वे अपनी सजा के अमल का इंतजार कर रहे हैं.
यूरोपियन सऊदी ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स (ESOHR ) के मुताबिक, विशेष आपराधिक अदालत ने हसन अल-फराज और यूसुफ अल-मनासिफ के अलावा अली-मब्यूक, जवाद कुरैसिस, अली अल-सुबैती और मही अल-मोहसिन को भी मौत की सजा सुनाई थी. इन मामलों में किशोरावस्था के दौरान कथित आतंकवाद-संबंधी गतिविधियों के आरोप शामिल हैं.
कपल को फांसी दिए जाने के बाद बढ़ा विवाद
हसन अल-फराज की फांसी का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब सऊदी अरब में बांग्लादेश के दो नागरिकों को मृत्युदंड दिए जाने को लेकर विवाद जारी है. खबरों के अनुसार, नजरुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर को 14 अक्टूबर को फांसी दी गई थी. बताया गया है कि दोनों पर एक मस्जिद में कथित अनैतिक कृत्य करने का आरोप था. कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि दोनों को चुंबन करते हुए पकड़ा गया था, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. सऊदी अधिकारियों ने उनके अपराध के संबंध में सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी नहीं दी है.

