UAE-Iran Tension: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ईरान के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है. UAE ने मंगलवार को क्षेत्रीय तनाव का हवाला देते हुए ईरान के साथ सभी व्यापार, वाणिज्यिक आदान-प्रदान और वित्तीय लेन-देन को अगले आदेश तक रोकने का ऐलान किया है. यह फैसला उस समय आया है, जब UAE ने ईरान से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों का आरोप लगाया, जबकि तेहरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया.
UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान से देश की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाया. UAE के विदेश मंत्रालय की संचार निदेशक अफरा अल हामेली ने कहा कि क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए ईरान के साथ सभी व्यापारिक और वाणिज्यिक गतिविधियां तथा वित्तीय लेन-देन अगले आदेश तक रोक दिए गए हैं.
मंत्रालय के मुताबिक, इनमें से पहली मिसाइल UAE के क्षेत्रीय जल के बाहर गिरी, जबकि दूसरी मिसाइल UAE के क्षेत्रीय जल के भीतर समुद्र में गिरी. बाद में जारी एक बयान में UAE ने कहा कि आकलन के बाद पता चला कि दोनों मिसाइलें समुद्री नौवहन को निशाना बना रही थीं और समुद्र में गिर गईं. मिसाइल खतरे की जानकारी सामने आने से कुछ समय पहले UAE के लोगों को फोन पर एक आपातकालीन चेतावनी भेजी गई थी. इसमें संभावित मिसाइल खतरे का जिक्र करते हुए लोगों से नजदीकी सुरक्षित इमारत में जाकर सुरक्षित स्थान पर रहने की अपील की गई थी. हालांकि, यह अलर्ट थोड़े समय बाद हटा लिया गया. यह जून में गलत अलार्म और जुलाई में एक ऐसे हमले की चेतावनी के बाद पहला बड़ा फोन अलर्ट था, जिसमें कथित हमला UAE की सीमा तक नहीं पहुंचा था.
ईरान ने UAE के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने UAE के आरोपों को “बेबुनियाद” बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया. तेहरान का कहना है कि इस तरह के आरोप क्षेत्रीय देशों के बीच भरोसा बढ़ाने और तनाव कम करने की कोशिशों को नुकसान पहुंचाते हैं. ईरान ने पड़ोसी देशों से ऐसे आरोपों से बचने की अपील की और इसे अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांत के खिलाफ बताया. यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. UAE और ईरान के बीच लंबे समय से व्यापारिक गतिविधियां होती रही हैं और क्षेत्रीय तनाव के बावजूद दोनों देशों के आर्थिक संपर्क महत्वपूर्ण रहे हैं. साथ ही ईरान ने चेतावनी दी है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका के साथ शांति समझौता नहीं हो जाता है.