ईरान के हाथ नहीं लगने देंगे न्यूक्लियर हथियार, यही है अमेरिका नंबर-1 लक्ष्य, ट्रंप का बड़ा ऐलान

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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US Iran Conflict: अमेरिका का रुख ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर बेहद सख्त नजर आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को साफ शब्दों में कहा कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा. ट्रंप ने इसे अमेरिका का “नंबर-1 लक्ष्य” बताया. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में ईरान के साथ तनाव और कूटनीतिक बातचीत दोनों जारी हैं. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर कहा कि अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य हमेशा यही रहेगा कि ईरान के पास किसी भी तरह का परमाणु हथियार न हो.

ट्रंप का यह बयान अमेरिकी प्रशासन के भीतर ईरान युद्ध के उद्देश्यों को लेकर सामने आए अलग-अलग बयानों के बाद आया है. इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि युद्ध को लेकर प्रशासन के सामने दो प्रमुख लक्ष्य हैं.  पिछले सप्ताह फॉक्स न्यूज को दिए गए इंटरव्यू में वेंस ने कहा था कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि खाड़ी देशों से तेल और गैस की आपूर्ति वैश्विक बाजार तक जारी रहे, ताकि ऊर्जा की कीमतों में स्थिरता बनी रहे. उन्होंने कहा था कि अमेरिकी प्रशासन के लिए अमेरिकियों के लिए तेल और गैस को सस्ता रखना पहला लक्ष्य है, जबकि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना दूसरा लक्ष्य है.

वेंस के इस बयान के बाद यह सवाल उठने लगा था कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी रणनीति में ऊर्जा सुरक्षा ज्यादा महत्वपूर्ण है या ईरान का परमाणु कार्यक्रम.

वेंस के बयान पर जब व्हाइट हाउस से सवाल पूछा गया तो प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा था कि दोनों लक्ष्य राष्ट्रपति ट्रंप के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अब ट्रंप के ताजा बयान ने इस मुद्दे पर उनका व्यक्तिगत जोर स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने सीधे तौर पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने को अमेरिका का “नंबर-1 लक्ष्य” बताया है.

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच परमाणु कार्यक्रम के अलावा तेल और गैस की आपूर्ति तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है. होर्मुज से दुनिया के ऊर्जा कारोबार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जुड़ा है. ऐसे में अमेरिका के लिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को स्थिर रखना भी बड़ी चुनौती है.

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