Liquor Ban in West Bengal: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग और प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए राज्य के कई हिस्सों में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी है. चुनावी माहौल को शांत और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए 21 अप्रैल से 29 अप्रैल तक शराब की दुकानों को बंद करने का फैसला लिया गया है.
पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होना है, ऐसे में उससे पहले ही संवेदनशील इलाकों में यह प्रतिबंध लागू कर दिया गया है. जिन क्षेत्रों में 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है, वहां शराब की बिक्री पूरी तरह रोक दी गई है. राजधानी कोलकाता और आसपास के जिलों उत्तर और दक्षिण 24 परगना में यह बैन 20 अप्रैल से ही लागू कर दिया गया, ताकि चुनाव से पहले किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके.
9 दिन का बैन क्यों जरूरी
अधिकारियों के मुताबिक, चुनाव के दौरान किसी भी तरह के प्रलोभन, अवैध गतिविधियों और कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए यह फैसला लिया गया है. यह प्रतिबंध 29 अप्रैल तक लागू रहेगा, हालांकि 24 अप्रैल को एक दिन के लिए शराब बिक्री की अनुमति दी गई है. आम तौर पर चुनाव वाले क्षेत्रों में वोटिंग से 48 घंटे पहले शराब की बिक्री पर रोक लगाई जाती है, लेकिन इस बार हालात को देखते हुए पहले ही सख्ती शुरू कर दी गई.
पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान
पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 23 अप्रैल को 152 सीटों पर मतदान होना है. इसी के मुताबिक 21 अप्रैल से शराब पर पाबंदी लागू होनी थी, लेकिन चुनाव आयोग ने सोमवार (20 अप्रैल) से ही बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया. यह कदम चुनावी माहौल को नियंत्रित रखने और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है.
शराब की बिक्री में आई तेजी
चुनाव आयोग ने इस सख्ती के पीछे अहम वजह भी बताई है. आयोग के अनुसार हाल के दिनों में शराब की बिक्री में असामान्य वृद्धि देखी गई है. एक बयान में चुनाव आयोग ने कहा, “यह देखा गया है कि शराब की बिक्री में असामान्य रूप से तेजी आई है.” बयान में आगे कहा गया, “पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में अप्रैल 2026 के दौरान WBSBCL डिपो से खुदरा विक्रेताओं द्वारा पैकेट वाली शराब उठाने में भी अचानक बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा, तय मानदंडों के आधार पर पहचाने गए संवेदनशील दुकानों की संख्या में भी असामान्य वृद्धि हुई है.”
चुनाव आयोग ने कहा कि वह शराब की निगरानी से जुड़ी गतिविधियों सहित कई स्रोतों से इस नतीजे पर पहुंचा है. ECI ने कहा कि अप्रैल में शराब की बिक्री पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में अधिक रही है.
TMC और BJP के बीच कड़ा मुकाबला
राज्य में इस बार चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प और कड़ा माना जा रहा है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है. BJP जहां राज्य में सत्ता हासिल करने का दावा कर रही है, वहीं TMC अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में जुटी हुई है. इस कारण चुनावी माहौल काफी गर्म बना हुआ है.
चुनाव आयोग का सख्त रुख
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साफ किया है कि चुनाव आयोग किसी भी हाल में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करेगा. उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल के प्रत्येक मतदाता को निडर होकर अपना वोट डालना चाहिए.” उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव भयमुक्त और हिंसामुक्त होंगे और आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न हो.
अधिकारियों ने कहा कि आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि चुनाव प्रलोभनमुक्त और बूथ जाम मुक्त हों. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग बंगाल सरकार, स्थानीय निकायों या स्वायत्त निकायों के किसी भी कर्मचारी को चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करने देगा. राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग पर भाजपा के इशारों पर काम करने आरोप लगाया है. हालांकि, आयोग ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है.
चुनाव का पूरा कार्यक्रम
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव कई चरणों में कराए जा रहे हैं. पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा. जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी.
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