रामानंद सागर के बेटे का निधन, 84 की उम्र में ली अंतिम सांस, गंभीर बीमारी से हारे जंग

Mumbai: मशहूर फिल्ममेकर रामानंद सागर के बेटे और प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक आनंद रामानंद सागर चोपड़ा का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. वह पिछले करीब 10-12 वर्षों से पार्किंसंस जैसी गंभीर बीमारी से संघर्ष कर रहे थे. उन्होंने मुंबई में 13 फरवरी को अंतिम सांस ली. 2005 में पिता रामानंद सागर के निधन के बाद आनंद सागर ने ही सागर आर्ट्स की बागडोर संभाली और यह सुनिश्चित किया कि परिवार की कलात्मक विरासत निरंतर आगे बढ़ती रहे.

टेलीविजन और फिल्म जगत के लिए दुखद खबर

भारतीय टेलीविजन और फिल्म जगत के लिए यह अत्यंत दुखद खबर है. उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरी मनोरंजन इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है. परिवार ने इस दुखद समाचार की पुष्टि करते हुए बताया कि उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार 13 फरवरी को ही शाम 4.30 बजे मुंबई के विले पार्ले स्थित पवन हंस श्मशान घाट पर संपन्न हुआ.

कालजयी शो की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

आनंद सागर उस गौरवशाली विरासत के अहम स्तंभ थे, जिसकी नींव उनके पिता डॉ. रामानंद सागर ने रखी थी. 1987 में जब दूरदर्शन पर रामायण का प्रसारण शुरू हुआ था, तब आनंद सागर ने पर्दे के पीछे रहकर इस कालजयी शो की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. वह सागर आर्ट्स के कार्यों को संभालने वाली दूसरी पीढ़ी के सबसे सक्रिय सदस्यों में से एक थे.

तकनीक के साथ दर्शकों के सामने किया पेश

अपने पिता के विजन को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने पौराणिक और धार्मिक कहानियों को आधुनिक तकनीक के साथ दर्शकों के सामने पेश किया. विशेष रूप से 2008 में बनी रामायण के नए वर्जन के निर्माण में उनका योगदान अविस्मरणीय रहा, जिसने युवा पीढ़ी को फिर से मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की गाथा से जोड़ा.

लोककथाओं को घर-घर पहुंचाया

टेलीविजन की दुनिया में आनंद सागर का नाम उन चुनिंदा निर्माताओं में गिना जाता है जिन्होंने भारतीय संस्कृति और लोककथाओं को घर-घर पहुंचाया. अलिफ लैला, जय जय बजरंगबली और जय शिवशंकर जैसे लोकप्रिय शोज उनके रचनात्मक निर्देशन और प्रोडक्शन सूझबूझ का प्रमाण रहे हैं. उन्होंने न केवल छोटे पर्दे बल्कि बड़े पर्दे पर भी अपनी छाप छोड़ी और आंखें व अरमान जैसी फिल्मों के प्रोडक्शन में अहम हिस्सा लिया.

निर्मित रामायण का पुनः प्रसारण

साल 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान जब पूरा देश घरों में कैद था, तब रामानंद सागर और उनके परिवार द्वारा निर्मित रामायण का पुनः प्रसारण किया गया. इस दौरान शो ने विश्व रिकॉर्ड तोड़ व्यूअरशिप हासिल की, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सागर परिवार का काम समय की सीमाओं से परे है.

सामग्री आज भी दर्शकों के दिलों में ताज़ा

आनंद सागर ने हमेशा इस बात पर गर्व महसूस किया कि उनकी बनाई सामग्री आज भी दर्शकों के दिलों में उतनी ही ताज़ा है. उनके परिवार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने की अपील की है और इस कठिन समय में साथ देने के लिए सभी शुभचिंतकों का आभार व्यक्त किया है.

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