भारतीय रंगमंच के एक स्वर्णिम युग का अंत: पद्मश्री से सम्मानित मशहूर एक्ट्रेस-डायरेक्टर विजया मेहता का निधन

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Vijaya Mehta Passes Away: मराठी रंगमंच की रीढ़ मानी जाने वाली जानी-मानी अभिनेत्री, निर्देशक और निर्माता विजया मेहता का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. उन्होंने अपने निवास स्थान पर अंतिम सांस ली. उनके जाने से भारतीय रंगमंच का एक स्वर्णिम युग समाप्त हो गया है. उनके निधन से पूरी मराठी फिल्म इंडस्ट्री और भारतीय थिएटर जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. मराठी थिएटर में उन्हें बेहद आदर और प्यार से ‘बाई’ कहकर पुकारा जाता था.

योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया

भारतीय रंगमंच और सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, कालिदास सम्मान, विष्णुदास भवे सुवर्ण पदक और संगीत नाटक अकादमी टैगोर रत्न जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया. फिल्म ‘रावसाहेब’ में उनके बेमिसाल अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का गौरव भी मिला था.

अभिनय और निर्देशन की बारीकियां सीखीं

विजया मेहता का जन्म 4 नवंबर 1934 को गुजरात के वडोदरा में हुआ था और उनका शुरुआती नाम विजया जयवंत था. उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी की थी. कला के प्रति उनके जुनून ने उन्हें थियेटर के महान गुरुओं, इब्राहिम अल्काजी और आदि मर्जबान तक पहुंचाया, जिनसे उन्होंने अभिनय और निर्देशन की बारीकियां सीखीं. सिर्फ मंच ही नहीं विजया मेहता ने बड़े पर्दे पर भी अपनी गहरी छाप छोड़ी.

‘रावसाहेब’ और ‘पेस्तनजी’ का निर्देशन

उन्होंने ‘रावसाहेब’ और ‘पेस्तनजी’ जैसी बेहतरीन फिल्मों का निर्देशन किया. वहीं, ‘पार्टी’ और ‘कलियुग’ जैसी क्लासिक फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता. दूरदर्शन के सुनहरे दौर में उनके द्वारा बनाए गए टीवी सीरियल ‘स्मृतिचित्रे’ और ‘लाइफलाइन’ काफी लोकप्रिय रहे थे. विजया मेहता कला के क्षेत्र में अपने कड़े अनुशासन और काम के प्रति अटूट समर्पण के लिए जानी जाती थीं.

नाना पाटेकर ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया

उनके मार्गदर्शन में अभिनय सीखकर नाना पाटेकर, विक्रम गोखले, नीना कुलकर्णी और अशोक सराफ जैसे कलाकारों ने अभिनय की दुनिया में एक बड़ा मुकाम हासिल किया. उन्होंने अपनी यादों और कला के सफर को समेटते हुए एक आत्मकथात्मक संस्मरण भी लिखा था जिसका नाम ‘झिम्मा: आठवणींचा गोफ’ है.

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