Heart Attack: कभी-कभी हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना आसान नहीं होता. खासकर जब ये लक्षण धीरे-धीरे शुरू हों या बीच-बीच में आते-जाते रहें. ऐसे में शरीर में नजर आने वाले किसी नए या असामान्य लक्षण को नजरअंदाज करने के बजाय उसे गंभीरता से लेना और समय पर मदद लेना जरूरी हो सकता है. अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं. ज्यादातर मामलों में हार्ट अटैक के कारण कार्डियक अरेस्ट नहीं होता. हालांकि, जब कार्डियक अरेस्ट होता है तो हार्ट अटैक इसके आम कारणों में से एक हो सकता है. इसके अलावा दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी दिल की धड़कन बंद हो सकती है.
कार्डियक अरेस्ट क्या होता है?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है. आमतौर पर ऐसा दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम में आई समस्या के कारण होता है, जिससे दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है.जब दिल शरीर में खून पंप करना बंद कर देता है, तो दिमाग, फेफड़ों और शरीर के दूसरे जरूरी अंगों तक रक्त नहीं पहुंच पाता. कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में व्यक्ति प्रतिक्रिया देना बंद कर सकता है. उसकी सांस रुक सकती है या वह सिर्फ हांफता हुआ नजर आ सकता है. अगर उसे तुरंत मदद नहीं मिलती है तो उसकी मौत हो सकती है.
कार्डियक अरेस्ट में तुरंत CPR देना क्यों जरूरी है?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट हुआ है तो तुरंत CPR देने से उसके बचने की संभावना दो से तीन गुना तक बढ़ सकती है. ऐसी स्थिति में सबसे पहले स्थानीय इमरजेंसी नंबर पर कॉल करना चाहिए और इसके बाद CPR शुरू करना चाहिए. अगर आसपास ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर यानी AED उपलब्ध है तो उसका इस्तेमाल जल्द से जल्द किया जाना चाहिए. अगर मौके पर दो लोग मदद कर रहे हैं तो एक व्यक्ति CPR शुरू कर सकता है, जबकि दूसरा इमरजेंसी सेवा को कॉल करने और AED तलाशने का काम कर सकता है.
कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में हर मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है. बिना मदद के हर गुजरते मिनट के साथ बचने की संभावना करीब 10 फीसदी कम हो सकती है. इमरजेंसी मेडिकल स्टाफ भी ऐसे व्यक्ति को बचाने के लिए जरूरी उपचार शुरू कर सकता है, जिसका दिल धड़कना बंद हो गया हो.
हार्ट अटैक क्या होता है?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, हार्ट अटैक तब होता है जब दिल के किसी हिस्से तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिल तक खून पहुंचाने वाली किसी प्रमुख नस में ब्लॉकेज हो जाती है. अगर खून के बहाव में आई इस रुकावट को जल्द दूर नहीं किया जाता, तो दिल के उस हिस्से की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, जिसे पर्याप्त मात्रा में खून और ऑक्सीजन नहीं मिल रही होती.
हार्ट अटैक के लक्षण अचानक सामने आ सकते हैं. इनमें सीने में तेज दर्द, शरीर के ऊपरी हिस्से के दूसरे भागों में बेचैनी, सांस लेने में परेशानी, ठंडा पसीना, जी मिचलाना या उल्टी जैसा महसूस होना शामिल हो सकता है. हालांकि, कुछ मामलों में लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और कई घंटों या दिनों तक बने रह सकते हैं.
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर है?
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट के विपरीत हार्ट अटैक के दौरान दिल आमतौर पर धड़कता रहता है. लेकिन इलाज मिलने में जितनी अधिक देरी होती है, दिल को नुकसान का खतरा उतना ही बढ़ जाता है. हार्ट अटैक किसी को भी हो सकता है. महिलाओं, डायबिटीज से पीड़ित लोगों और बुजुर्गों में इसके लक्षण हमेशा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते. उदाहरण के लिए, कुछ लोगों को सीने में दर्द महसूस नहीं हो सकता है. अगर आपको पूरी तरह यकीन नहीं है कि यह हार्ट अटैक है या नहीं, तब भी स्थानीय इमरजेंसी नंबर पर कॉल करना चाहिए. ऐसी स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है.
हार्ट अटैक के शक में क्या करें?
सबसे अच्छा यही है कि स्थानीय इमरजेंसी नंबर पर कॉल किया जाए, ताकि व्यक्ति को जल्द से जल्द इमरजेंसी रूम तक पहुंचाया जा सके. इमरजेंसी मेडिकल सर्विस के कर्मचारी पहुंचते ही इलाज शुरू कर सकते हैं. एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचने वाले सीने में दर्द के मरीजों को अस्पताल में आमतौर पर जल्दी इलाज भी मिल जाता है.
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