वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव का असर, पैरासिटामोल समेत कई जरूरी दवाएं हुईं महंगी, मरीजों की बढ़ी चिंता

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New Delhi: देश भर में पैरासिटामोल से लेकर कई एंटीबायोटिक्स तक की जरूरी दवाओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे मरीजों की चिंता बढ़ना तय है. बता दें कि दुनियाभर में बढ़ती महंगाई का असर अब सिर्फ रोजमर्रा की चीजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव दवा बाजार पर भी देखने को मिल रहा है. दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव और कच्चे माल की बढ़ती लागत है.

API की कीमतों में लगातार इजाफा

दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट (API) की कीमतों में पिछले कुछ समय में लगातार इजाफा हुआ है. इसके अलावा समुद्री परिवहन, पैकेजिंग मटेरियल और आयात लागत भी काफी महंगी हो गई है, जिसका सीधा असर फार्मा कंपनियों की उत्पादन लागत पर पड़ा है. पैरासिटामोल, पेनिसिलिन, सेफालोस्पोरिन और अन्य दर्द निवारक व एंटीबायोटिक दवाओं के कच्चे माल की कीमतों में 40% से 60% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

दवाएं पहले की तुलना में महंगी

इसी कारण बाजार में आने वाले नए स्टॉक और बैच की दवाएं पहले की तुलना में महंगी बिक रही हैं. हालांकि पुराने स्टॉक पर फिलहाल कीमतों का असर सीमित है, लेकिन आने वाले समय में स्थिति बदल सकती है. दवा कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर उन मरीजों पर पड़ेगा जो लंबे समय से नियमित दवाओं का सेवन कर रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की लागत में जल्द राहत नहीं मिलती, तो दवाओं के दाम और भी बढ़ सकते हैं.

मासिक खर्च बढ़ने की संभावना

इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का मासिक खर्च बढ़ने की संभावना है, जो पहले से ही महंगाई से जूझ रहे परिवारों के लिए एक अतिरिक्त बोझ साबित हो सकता है. फार्मा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में अगर सप्लाई चेन और कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तो आने वाले महीनों में कई और जरूरी दवाओं के दाम भी बढ़ सकते हैं. ऐसे में दवा बाजार में यह स्थिति आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है.

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