शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव कई बार किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं. अक्सर लोग खांसी, थकान या सांस लेने में हल्की परेशानी को मौसम में बदलाव या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. कुछ लोग कई दिनों तक घरेलू नुस्खों के सहारे इन समस्याओं को ठीक करने की कोशिश करते रहते हैं. लेकिन लगातार बनी रहने वाली खांसी को हमेशा सामान्य नहीं मानना चाहिए, क्योंकि कुछ मामलों में यह हृदय से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है.
आमतौर पर हृदय रोग का नाम सुनते ही सीने में दर्द, घबराहट और सांस फूलने जैसे लक्षण ध्यान में आते हैं. हालांकि, लगातार खांसी भी कभी-कभी दिल की खराब सेहत से जुड़ी हो सकती है. खासकर जब खांसी रात में बढ़ जाए या इसके साथ सांस लेने में परेशानी और जल्दी थकान महसूस होने लगे, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है.
दिल की बीमारी का फेफड़ों पर कैसे पड़ता है असर?
दिल और फेफड़े शरीर में एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं. दिल का मुख्य काम खून को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाना है, जबकि फेफड़े खून में ऑक्सीजन मिलाते हैं. जब हृदय की पंप करने की क्षमता प्रभावित होती है, तो इसका असर फेफड़ों पर भी पड़ सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार खांसी का एक संभावित कारण हार्ट फेलियर हो सकता है. इस स्थिति में हृदय शरीर की जरूरत के मुताबिक खून पंप नहीं कर पाता.
इसके कारण रक्त वाहिकाओं में दबाव बढ़ सकता है और फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है. इस स्थिति को पल्मोनरी कंजेशन कहा जाता है. फेफड़ों में तरल जमा होने से सांस लेने की सामान्य प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. शरीर इस परेशानी के प्रति खांसी के रूप में प्रतिक्रिया दे सकता है. ऐसे में मरीज को लगातार खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, जल्दी थकान और सीने में भारीपन भी महसूस हो सकता है.
रात में ज्यादा खांसी आना भी हो सकता है चेतावनी का संकेत
अगर किसी व्यक्ति को दिन के मुकाबले रात में ज्यादा खांसी आती है, तो इसके कई कारण हो सकते हैं. हालांकि, कुछ मामलों में यह हृदय संबंधी समस्या से भी जुड़ी हो सकती है. दरअसल, जब व्यक्ति लेटता है तो शरीर में मौजूद तरल पदार्थ का वितरण बदल जाता है. हार्ट फेलियर से पीड़ित लोगों में इससे फेफड़ों पर दबाव बढ़ सकता है और सांस लेने में परेशानी हो सकती है. इस वजह से रात में खांसी बढ़ सकती है और मरीज की नींद भी प्रभावित हो सकती है.
कुछ लोगों को सोते समय अचानक सांस लेने में परेशानी महसूस होती है और वे हांफते हुए जाग जाते हैं. ऐसी स्थिति में उन्हें सांस लेने के लिए बैठना पड़ता है. अगर लेटने पर सांस फूलने लगे और बैठने या खड़े होने पर राहत मिले, तो इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. यह हार्ट फेलियर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण लक्षण हो सकता है.
सफेद या गुलाबी झागदार बलगम दिखे तो तुरंत लें मदद
खांसी के साथ निकलने वाले बलगम का रंग और बनावट भी कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में संकेत दे सकते हैं. अगर किसी व्यक्ति को सांस लेने में गंभीर परेशानी के साथ सफेद या गुलाबी रंग का झागदार बलगम आने लगे, तो यह फेफड़ों में तेजी से तरल जमा होने यानी पल्मोनरी एडेमा का संकेत हो सकता है.
पल्मोनरी एडेमा एक गंभीर और जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है. ऐसी स्थिति में मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाना जरूरी है. सांस लेने में गंभीर परेशानी, अचानक हांफना या गुलाबी झागदार बलगम आने पर घरेलू उपचार या इंतजार करने के बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें.
लगातार खांसी के पीछे संक्रमण, एलर्जी और फेफड़ों की बीमारियों समेत कई कारण हो सकते हैं. इसलिए केवल खांसी के आधार पर हार्ट फेलियर का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए. लेकिन खांसी के साथ सांस फूलना, रात में अचानक सांस टूटना, पैरों में सूजन या असामान्य थकान जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए.

