Pink Salt : आज के समय में लोग हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे “फैंसी” फूड आइटम्स का ट्रेंड भी तेज़ी से बढ़ा है इन्हीं में से एक है पिंक साल्ट यानी कि सेंधा नमक. बता दें कि इसमें ज़्यादा मिनरल होते हैं, इसलिए कई लोग साधारण आयोडीन वाले नमक की जगह इसे इस्तेमाल करने लगे हैं. लेकिन यह बदलाव जितना हेल्दी दिखता है, उतना होता नहीं. रोजमर्रा के उपयोग में आयोडीन युक्त नमक को पूरी तरह गैर-आयोडीन नमक से बदलना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है.
बता दें कि गुलाबी नमक में ट्रेस मिनरल्स जरूर होते हैं, लेकिन उनकी मात्रा बेहद कम होती है. जो कि किसी भी पोषण लाभ के लिए अधिक मात्रा में लेना पड़ेगा, जो स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है. ऐसे में लोगों को यह गलतफहमी हो सकती है कि वे ज्यादा मिनरल ले रहे हैं, जबकि वास्तव में वे आयोडीन जैसे जरूरी पोषक तत्व से वंचित हो सकते हैं. इसके साथ ही गुलाबी नमक की कीमत भी सामान्य आयोडीन युक्त नमक से लगभग दोगुनी होती है. जो कि जेब पर भी भारी पड़ता था.
थायरॉइड विकार की गंभीर समस्या
आयोडीन की कमी भारत में कभी एक बड़ी पब्लिक हेल्थ समस्या थी. इसकी वजह से थायरॉइड विकार, गर्भावस्था में जटिलताएं और बच्चों में मानसिक विकास रुकने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आती थीं. वहीं देखने में तो सी-सॉल्ट, पिंक साल्ट या अन्य मिनरल सॉल्ट डाइट ट्रेंड के कारण आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन रोज़मर्रा के इस्तेमाल के लिए आयोडीन युक्त नमक एक सस्ता, सुरक्षित विकल्प है. बता दें कि “फैंसी” दिखने वाला हर विकल्प बेहतर नहीं होता कई बार साधारण आयोडीन वाला नमक ही आपकी थायरॉइड हेल्थ और संपूर्ण पोषण सुरक्षा के लिए सबसे समझदारी भरा चुनाव है.
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