Sydney H5N1 Bird Flu: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में खतरनाक एच5एन1 बर्ड फ्लू स्ट्रेन की पहली पुष्टि हुई है. सिडनी के नॉर्दर्न बीच इलाके में मिले एक समुद्री पक्षी में संक्रमण की पुष्टि के बाद अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है. खास तौर पर पालतू पक्षी, मुर्गियां और कुत्ते पालने वाले लोगों से जंगली पक्षियों के संपर्क को लेकर सतर्क रहने को कहा गया है.
न्यू साउथ वेल्स (NSW) की कृषि मंत्री तारा मोरियार्टी ने पत्रकारों को बताया कि अगस्त के आखिर में सिडनी के नॉर्दर्न बीच में मिले एक ग्रेटर क्रेस्टेड टर्न की जांच के दौरान एच5एन1 स्ट्रेन का पता चला. जून में इस खतरनाक स्ट्रेन के ऑस्ट्रेलिया की मुख्य भूमि पर पहुंचने के बाद सिडनी में यह पहला कन्फर्म केस है.
पालतू पक्षियों और कुत्तों को लेकर सावधानी की अपील
तारा मोरियार्टी ने सिडनी के उन लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा है, जिनके घरों में पालतू पक्षी या मुर्गियां हैं. उन्होंने जंगली पक्षियों के संपर्क से बचने की सलाह दी है. कुत्ते पालने वाले लोगों को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके पालतू कुत्ते मरे हुए जानवरों के शव न खाएं और न ही जंगली पक्षियों का पीछा करें.
मेयर ने जताई और मामलों की आशंका
नॉर्दर्न बीचेस काउंसिल की स्थानीय मेयर सू हीन्स ने कहा कि यह मामला संभवतः कई मामलों में से पहला हो सकता है. उन्होंने कहा कि इलाके को इस खतरनाक स्ट्रेन के संभावित विनाशकारी असर के लिए तैयार रहना चाहिए. इस वायरस ने दुनिया भर में लाखों पक्षियों की जान ली है. सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई संघीय सरकार के ताजा आंकड़ों में बुधवार तक देशभर में एच5एन1 बर्ड फ्लू के 468 कन्फर्म मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से 20 मामले न्यू साउथ वेल्स में हैं. हालांकि, NSW सरकार ने कहा है कि राज्य में कमर्शियल पोल्ट्री झुंडों, कैद में रखे गए पक्षियों या मवेशियों में एच5एन1 का कोई मामला नहीं मिला है.
इंसानों के लिए कितना खतरनाक है H5N1?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एच5एन1 कई इन्फ्लूएंजा वायरस में से एक है, जो पक्षियों में एवियन इन्फ्लूएंजा यानी बर्ड फ्लू नाम की तेजी से फैलने वाली सांस की बीमारी पैदा करता है. इसके संक्रमण के मामले इंसानों समेत अन्य स्तनधारी जीवों में भी दर्ज किए गए हैं. इंसानों में एच5एन1 संक्रमण से हल्के से लेकर गंभीर तक कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं. कुछ मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है.
इसके प्रमुख लक्षण सांस से जुड़े होते हैं, लेकिन कंजंक्टिवाइटिस यानी आंख आने और सांस से जुड़े नहीं होने वाले अन्य लक्षण भी सामने आए हैं. ऐसे लोगों में भी ए(एच5एन1) वायरस पाया गया है, जो संक्रमित जानवरों या उनके वातावरण के संपर्क में आए थे, लेकिन उनमें संक्रमण के कोई लक्षण दिखाई नहीं दिए.
1996 में सामने आया था यह वायरस वंश
एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का गूज/ग्वांगडोंग-लीनिएज वंश पहली बार 1996 में सामने आया था. इसके बाद से यह पक्षियों में बीमारी फैलाता रहा है. 2020 के बाद इस वायरस के एक वैरिएंट के कारण कई देशों में जंगली पक्षियों और पोल्ट्री की बड़ी संख्या में मौतें हुईं. यह वायरस पहले अफ्रीका, एशिया और यूरोप में फैला. इसके बाद 2021 में उत्तरी अमेरिका और 2022 में मध्य और दक्षिण अमेरिका तक पहुंच गया.
2021 से 2022 के बीच यूरोप और उत्तरी अमेरिका में एवियन इन्फ्लूएंजा का सबसे बड़ा और सबसे लंबा प्रकोप देखा गया. इस दौरान जंगली पक्षियों में वायरस असामान्य रूप से लंबे समय तक बना रहा.
स्तनधारी जीव भी वायरस की चपेट में आए
2022 से इन्फ्लूएंजा ए(एच5), जिसमें ए(एच5एन1) भी शामिल है, वायरस से स्तनधारी जीवों में जानलेवा प्रकोप की खबरें बढ़ी हैं. हालांकि, ऐसे कुछ और प्रकोप भी हुए होने की संभावना है, जिनका पता नहीं चल सका या जिनकी रिपोर्ट नहीं की गई. वायरस से जमीन और समुद्र दोनों जगह रहने वाले स्तनधारी प्रभावित हुए हैं. इनमें फर के लिए पाले जाने वाले जानवर, सील और सी लायन शामिल हैं. इसके अलावा लोमड़ी, भालू, ऊदबिलाव, रैकून, बिल्ली, कुत्ते, गाय, बकरी और अन्य जंगली व पालतू जानवरों में भी एच5एन1 संक्रमण का पता चला है.
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