रिसर्च में दावा-अब अल्ट्रासाउंड से ही कम हो जाएगा कैंसर का खतरा, लाखों मरीजों को मिलेगी राहत

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Health Tips: कैंसर से जूझ रहे लाखों मरीजों के लिए उम्मीद भरी खबर है. एक नई स्टडी से पता चला है कि अल्ट्रासाउंड कैंसर सेल्स पर खास तौर पर हमला कर सकता है. मुंह के कैंसर की सेल्स अल्ट्रासाउंड के प्रति संवेदनशील हो सकती हैं और यह तकनीक उन्हें खास तौर पर निशाना बनाने में मदद कर सकती है, जिससे स्वस्थ सेल्स को कोई नुकसान नहीं पहुंचता.

दूसरे कैंसर के लिए ज़्यादा सुरक्षित

रिसर्चर्स का कहना है कि एडवांस्ड प्रीक्लिनिकल मॉडल्स में और जांच के बाद यह तरीका ओरल कैंसर और शायद ब्रेस्ट और स्किन कैंसर जैसे आसानी से पहुंच वाले दूसरे कैंसर के लिए ज़्यादा सुरक्षित और टारगेटेड इलाज के तरीके विकसित करने में मदद कर सकता है. बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) की इस स्टडी में यह बातें खुलकर सामने आई हैं. रिसर्चर्स का कहना है कि यह संवेदनशीलता ‘ट्रोपोमायोसिन 2.1’ के कम लेवल के कारण हो सकती है.

मरीजों से लिए गए ओरल ट्यूमर सैंपल्स पर काम

यह एक मैकेनोसेंसरी प्रोटीन है जो शरीर की सेल्स को मैकेनिकल स्टिमुलेशन को महसूस करने और उसे झेलने में मदद करता है. MS रमैया मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों के क्लिनिशियन्स (चिकित्सकों) सहित टीम ने मरीजों से लिए गए ओरल ट्यूमर सैंपल्स पर काम करते हुए यह पता लगाने की कोशिश की कि क्या कम-फ़्रीक्वेंसी वाले अल्ट्रासाउंड मैकेनिकल स्टिमुलेशन से मुंह के कैंसर की सेल्स को खास तौर पर खत्म किया जा सकता है.

मुंह की स्वस्थ एपिथेलियल सेल्स को कोई नुकसान नहीं

उन्होंने पाया कि जब ओरल कैंसर सेल्स को अल्ट्रासाउंड-आधारित मैकेनिकल स्टिमुलेशन दिया गया, तो उनमें खास तौर पर सेल डेथ (कोशिका मृत्यु) हुई, जबकि मुंह की स्वस्थ एपिथेलियल सेल्स को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. ये नतीजे ‘मटीरियल्स टुडे बायो’ जर्नल में पब्लिश हुए हैं. अल्ट्रासाउंड एक नॉन-इनवेसिव इमेजिंग टेस्ट है, जिसमें शरीर के अंदर के टिश्यूज और अंगों की रियल-टाइम तस्वीरें बनाने के लिए हाई-फ़्रीक्वेंसी साउंड वेव्स का इस्तेमाल किया जाता है.

कम-फ़्रीक्वेंसी वाले अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल

स्टडी में ओरल कैंसर सेल्स की बायोमैकेनिकल कमजोरियों का फायदा उठाने के लिए कम-फ़्रीक्वेंसी वाले अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल किया गया, जिससे खास तौर पर सेल डेथ को बढ़ावा मिला. लेखकों ने लिखा-“कैंसर सेल्स को ऑप्टिमाइज़्ड US (अल्ट्रासाउंड) पैरामीटर्स के संपर्क में लाया गया, जिससे सामान्य सेल्स को नुकसान पहुंचाए बिना कैंसर सेल एपोप्टोसिस (मैकेनोप्टोसिस) को खास तौर पर शुरू होते देखा गया.”

टिश्यूज में फैलने और घुसने की क्षमता

टीम ने यह भी पाया कि अल्ट्रासाउंड ने कैंसर सेल्स की आसपास के टिश्यूज में फैलने और घुसने की क्षमता को काफी कम कर दिया. ओरल ट्यूमर के माइक्रो-एनवायरनमेंट (सूक्ष्म वातावरण) की नकल करने वाले 3D को-कल्चर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हुए, टीम ने पाया कि अल्ट्रासाउंड ने ट्यूमर कोर के चारों ओर कैंसर से जुड़ी सेल्स द्वारा बनाई गई घनी कैप्सूल जैसी रुकावट को तोड़ दिया.

इलाज के फेल होने का कारण

यह रुकावट दवाओं और इम्यून सेल्स को ट्यूमर कोर तक पहुंचने से रोक सकती है और इलाज के फेल होने का कारण बन सकती है. चूंकि अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल पहले से ही कई तरह के मेडिकल कामों में किया जा रहा है, इसलिए इन नतीजों से पता चलता है कि अल्ट्रासाउंड मैकेनोस्टिम्यूलेशन का इस्तेमाल ओरल कैंसर सेल्स की मैकेनिकल कमज़ोरी का फ़ायदा उठाने के लिए किया जा सकता है.

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