Monsoon Health Tips: बारिश की बूंदें गर्मी से राहत जरूर देती हैं, लेकिन मानसून का मौसम अपने साथ सेहत से जुड़ी कई चुनौतियां भी लेकर आता है. वातावरण में बढ़ी नमी और मौसम में बदलाव के कारण इस दौरान इंफेक्शन, बुखार, सर्दी-खांसी और सांस से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं. कई लोगों को जोड़ों में दर्द, बदन में अकड़न, थकान, पेट में जलन और एसिडिटी जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है. ऐसे में खानपान और रोजमर्रा की आदतों में मौसम के अनुसार बदलाव करना महत्वपूर्ण हो जाता है.
आयुर्वेद के अनुसार, मानसून के दौरान शरीर में वात और पित्त का असंतुलन हो सकता है, जबकि कुछ लोगों में कफ से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं. आशा आयुर्वेदा क्लीनिक की डॉक्टर चंचल शर्मा ने बताया कि इस मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए. साथ ही कुछ ऐसी आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है, जो बदलते मौसम में शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती हैं.
मानसून में क्यों बिगड़ सकता है वात का संतुलन?
नमी और ठंडी हवा के कारण शरीर में वात बढ़ने की बात कही जाती है. इसके चलते कुछ लोगों को जोड़ों में दर्द, अकड़न, बदन दर्द और थकान जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं. ऐसे मौसम में लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बजाय शरीर को सक्रिय रखना महत्वपूर्ण माना जाता है. हालांकि जरूरत से ज्यादा व्यायाम करने से भी बचना चाहिए.
पित्त बढ़ने पर पाचन पर पड़ सकता है असर
गर्मी के बाद बारिश का मौसम आने पर जमीन से उठने वाली भाप को आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से प्रकृति में एसिडिक बताया गया है. इसके कारण शरीर में पित्त बढ़ सकता है. पित्त के असंतुलन को पेट में जलन और एसिडिटी जैसी परेशानियों से जोड़कर देखा जाता है. इसका असर पाचन क्रिया पर भी पड़ सकता है और भोजन को पचने में अधिक समय लग सकता है. इसलिए मानसून में खानपान को लेकर सावधानी बरतना जरूरी माना जाता है.
कफ बढ़ने पर सर्दी-खांसी की परेशानी
जिन लोगों को मौसम में हल्की ठंडक आते ही सर्दी, खांसी और कफ की समस्या होने लगती है, आयुर्वेद में इसे बढ़े हुए कफ दोष से जोड़कर देखा जाता है. बारिश के मौसम में नमी और ठंडक के कारण ऐसे लोगों की परेशानी बढ़ सकती है. ऐसे में घर में बंद रहने के बजाय मौसम के अनुसार खानपान और जीवनशैली में जरूरी बदलाव करने की सलाह दी जाती है. आइए जानते हैं मानसून में इम्युनिटी और सेहत का ध्यान रखने के लिए किन चीजों को अपनाया जा सकता है.
1. हल्दी वाला दूध
हल्दी का स्वभाव गर्म माना जाता है. मानसून के मौसम में गर्म दूध में कम मात्रा में हल्दी मिलाकर सेवन करने से सर्दी जैसी समस्याओं से लड़ने की शक्ति मिल सकती है. हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं और इसे नेचुरल हीलिंग से भी जोड़कर देखा जाता है. बारिश के मौसम में बदलते तापमान और ठंडी हवा के बीच हल्दी वाला दूध शरीर को गर्माहट देने में भी सहायक माना जाता है.
2. आंवला
मानसून में आंवले का सेवन फायदेमंद माना जाता है, खासतौर पर ऐसे समय में जब पाचन कमजोर पड़ सकता है और इंफेक्शन का खतरा बढ़ने लगता है. आंवले को रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए उपयोगी माना जाता है. इसे नियमित खानपान में शामिल करने से इम्युनिटी को सपोर्ट मिल सकता है और सामान्य इंफेक्शन के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है.
3. च्यवनप्राश
च्यवनप्राश को आयुर्वेद के पुराने और औषधीय गुणों वाले आहारों में शामिल किया जाता है. इसके सेवन को ऊर्जा और सहनशक्ति बढ़ाने से जोड़कर देखा जाता है. दिए गए सुझाव के अनुसार, च्यवनप्राश का सेवन गुनगुने दूध या पानी के साथ किया जा सकता है. हालांकि मात्रा और सेवन का तरीका व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है.
4. ठंडे पानी से बचें
आयुर्वेद में बदलते मौसम के अनुसार रोजमर्रा की आदतों में बदलाव करने पर जोर दिया जाता है. गर्मियों में ठंडा पानी पीने की आदत कई लोग बारिश शुरू होने के बाद भी जारी रखते हैं, लेकिन मानसून में यह आदत कुछ लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है. इसकी जगह हल्का गर्म या गुनगुना पानी पीने की सलाह दी गई है. साथ ही प्यास लगने पर ही जरूरत के अनुसार पानी पीना चाहिए.
5. अधिक व्यायाम से बचें, योग को दिनचर्या में करें शामिल
नमी वाले मौसम में आलस और सुस्ती महसूस होना आम है, लेकिन लगातार निष्क्रिय रहना भी उचित नहीं माना जाता. वहीं शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने वाले व्यायाम से बचने की सलाह दी जाती है. अपनी दिनचर्या में प्राणायाम, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, त्रिकोणासन और भुजंगासन जैसे योगाभ्यास शामिल किए जा सकते हैं. नियमित और संतुलित शारीरिक गतिविधि मानसून में सक्रिय रहने में मदद कर सकती है.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य आयुर्वेदिक मान्यताओं और विशेषज्ञ द्वारा साझा सुझावों पर आधारित है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, एलर्जी या स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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