Baby Brain Development: बच्चों की सेहत और विकास को लेकर हर माता-पिता काफी चिंता में रहते हैं. जब बच्चा छह महीने का होता है और उसे धीरे-धीरे ठोस आहार देना शुरू किया जाता है, तब माता-पिता के लिए यह समझना बेहद जरूरी होता है कि उसकी प्लेट में किन-किन चीजों को जगह दी जाए,जो बच्चे की शारीरिक और मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाए.
तो बता दें कि इस उम्र में सिर्फ पेट भरना ही काफी नहीं होता बल्कि ऐसा पौष्टिक खाना देना जरूरी होता है. बच्चे का मानसिक विकास उसके खान-पान, नींद, खेल, बातचीत, आसपास के माहौल और देखभाल समेत कई चीजों पर निर्भर करता है. लेकिन अगर कुछ पोषक खाद्य पदार्थ उसकी डाइट में शामिल कर दें, तो विकास बेहतर तरीके से होता है.
अखरोट से तैयार प्यूरी या पाउडर
अखरोट में हेल्दी फैट्स पाए जाते हैं और यह प्लांट-बेस्ड ओमेगा-3 फैटी एसिड का भी स्रोत है. ओमेगा-3 फैट शरीर और दिमाग के सामान्य विकास के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में शामिल है. इसके अलावा अखरोट में एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड भी पाए जाते हैं. छह महीने के बाद बच्चे को अखरोट सीधे टुकड़ों के रूप में देने के बजाय बहुत बारीक पिसे हुए रूप में देना सही रहता है. अखरोट को हल्का भूनकर उसका पाउडर तैयार करें. इसे बच्चे के लिए बनाए गए दलिया, दही या किसी फल की प्यूरी में थोड़ी मात्रा में मिलाए.
अंडा भी पौष्टिक विकल्प
अंडा भी बच्चे की डाइट में शामिल किया जा सकने वाला पोषक खाना है. इसमें प्रोटीन के साथ कई जरूरी विटामिन और मिनरल पाए जाते हैं. खासतौर पर अंडे की जर्दी में कोलीन मौजूद होता है. कोलीन शरीर में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है. यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के सामान्य विकास के लिए भी जरूरी पोषक तत्व माना जाता है. छह महीने के बाद बच्चे को अंडा देना शुरू किया जा सकता है, लेकिन इसे हमेशा अच्छी तरह पकाकर और बच्चे की उम्र के मुताबिक नरम बनाकर देना चाहिए. उबले हुए अंडे को अच्छी तरह मैश करे और फिर एवोकाडो या कोई नरम चीज के साथ मिलाकर बच्चे को दें.
राजगीरा में भी कई जरूरी पोषक तत्व
राजगीरा भी छोटे बच्चों के लिए तैयार किए जाने वाले भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है. इसमें प्रोटीन, आयरन और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. आयरन बच्चे की सामान्य वृद्धि और शरीर में जरूरी प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि प्रोटीन शरीर के ऊतकों और विकास में भूमिका निभाता है. बच्चे के लिए राजगीरा तैयार करते समय इसे अच्छी तरह पकाना जरूरी है, ताकि वह पूरी तरह नरम हो जाए और बच्चे के लिए निगलना आसान रहे. इसमें अच्छी तरह मैश की हुई सब्जियां मिलाएं.
स्वाद को हल्का मीठा बनाने और भोजन में अलग-अलग पोषक तत्व जोड़ने के लिए शकरकंद या सेब की प्यूरी भी मिलाई जा सकती है. बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट के लिए अलग-अलग तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे देना जरूरी है, ताकि उसे सभी जरूरी पोषक तत्व मिल सकें. साथ ही, छह महीने की उम्र के बाद भी मां का दूध बच्चे के लिए महत्वपूर्ण होता है और पूरक आहार इसके साथ धीरे-धीरे शुरू किया जाता है.