कितने प्रकार के होते हैं स्नान, नहाने के बाद भूलकर भी न करें ये काम

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Bathing Rules:  हिंदू धर्म में सभी जलतीर्थ पर जाकर स्नान करने की बड़ा महत्व माना गया है. यही वजह है कि तीज-त्योहार और विशेष पर्व आदि के मौके पर पवित्र नदियों के पावन जल में लोग आस्था डुबकी लगाने पहुंचते हैं. धर्मशास्त्र में स्नान की महत्ता और इससे जुड़े नियमों को लेकर विस्तार से बताया गया है. ऐसे में चलिए जानते है कि स्नान करते समय और उसके बाद आखिर किन बातों का ख्याल रखना चाहिए? साथ ही यह भी कि किस समय किया गया कौन सा स्थान क्या फल देता है.

कितने प्रकार के होते हैं स्नान 

भविष्य पुराण के अनुसार स्नान चार प्रकार के होते हैं.
वायव्य – यह स्नान गौ आदि की रज से किया जाता है.
वारुण – यह स्नान समुद्र आदि में किया जाता है.
ब्राहम्य – यह स्नान मंत्र के साथ किया जाता है.
दिव्य – यह स्नान बादलों के द्वारा किये जाने वाली वर्षा के जल से किया जाता है.
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इन सभी में वारुण स्नान को सर्वोत्तम माना गया है.

किस समय कौन सा होता है स्नान 

  1. हिंदू मान्यता के अनुसार, यदि प्रात:काल 4 से 5 बजे के बीच अपने आराध्य देवी या देवता का ध्यान करते हुए स्नान किया जाए, तो वह स्नान ब्रह्म स्नान कहलाता है. यह स्नान अत्यंत ही शुभ और सुख-सौभाग्य को बढ़ाने वाला माना गया है.
  2. वहीं, 5 से 6 बजे के बीच किया जाने वाला स्नान देव स्नान कहलाता है. यह स्नान भी ब्रह्म स्नान की तरह शुभ माना जाता है और इससे पवित्र नदियों और ईश्वर का ध्यान करते हुए करने पर व्यक्ति की यश एवं कीर्ति बढ़ती है.
  3. हिंदू मान्यता के अनुसार, य​दि कोई व्यक्ति सुबह 6 से 8 बजे के बीच स्नान करता है तो वह सामान्य मानव स्नान कहलाता है, जिसे करने पर मनुष्य तन और मन से पवित्र होता है.
  4. इसके अलावा, सूर्योदय के बाद तकरीबन दो घंटे बाद जो भी स्नान किया जाता है, वह राक्षसी स्नान में आता है. धर्मशास्त्र में इससे बचने और शुभ समय में स्नान करने की बात कही गई है.

स्नान से जुड़े जरूरी नियम 

  • हिंदू मान्यता के अनुसार, स्नान करते समय आपका मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. वहीं, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके भूलकर भी स्नान न करें, क्योंकि यह पितरों की दिशा मानी जाती है. इस दिशा की ओर मुख करके स्नान करने पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है.
  • इसके अलावा, कभी भी पूर्ण रूप से निर्वस्त्र होकर न तो बाथरूम में और न ही नदी में स्नान करना चाहिए.
  • वहीं, स्नान हमेशा शुद्ध एवं पवित्र जल से करना चाहिए. कभी भी किसी के द्वारा कुएं या हैंडपंप आदि से निकाले गये पानी अथवा किसी के द्वारा प्रयोग करने के बाद बचे हुए पानी से नहीं नहाना चाहिए.
  • सभी तीज-त्योहार पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए. ऐसा करने पर तीर्थ स्नान का पुण्यफल प्राप्त होता है.
  • स्नान करते समय पवित्र नदियों का स्मरण करते समय ये मंत्र पढ़ना चाहिए – गंगा च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदे सिंधु कावेरी जलेस्मिन संनिधिम कुरु.

स्नान करने के बाद कभी न करें ये काम 

स्नान करने के बाद गंदे पानी को बाल्टी या टब में कभी न छोड़े.

इसके अलावा, स्नान करने के बाद गंदे और गीले कपड़ों को बाथरूम में नहीं छोड़ना चाहिए. वहीं, अगर नदी में स्नान कर रहे हैं तो आपको कभी भी स्नान करने के बाद अपने कपड़े गंगा आदि नदी में नहीं धुलने चाहिए.

नहाने के बाद कभी भी पहले पहने हुए गंदे कपड़े नहीं पहनने चाहिए.

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