Inner Strength: जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्मशक्ति और अध्यात्म, दोनों का ही समावेश होना जरूरी होता है. अध्यात्मिक क्रियाकलाप व्यक्ति की आत्मशक्ति को प्रबल कर व्यक्ति के अन्दर असीमित उर्जा का संचार करते हैं. वहीं, आत्मशक्ति अविकसित रूप में सभी में होती है लेकिन इस उर्जा का पूर्ण प्रयोग करना सिर्फ कुछ ही लोग जानते हैं. बता दें कि आत्मशक्ति ही व्यक्ति को सफलता की ओर ले जाती है.
दरअसल, ज्योतिष शास्त्र में सूर्य आत्मा का कारक होने से जन्मकुण्डली में सूर्य की स्थिति से व्यक्ति का आत्मबल आदि का आकलन किया जाता है. वहीं, आत्मबल बढ़ाने के लिए सूर्य का उपाय करना अतिआवश्यक है. सूर्य जन्मपत्री में लग्नेश, भाग्येश, पंचमेश, कारक होने पर माणिक्य धारण करने से लोगों के आत्मविश्वास में वृद्धि देखी गई है. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ विपत्ति बाधाओं से मुक्ति के लिए, जनसाधारण के लिए सरल माध्यम है.
कमजोर आत्मबल
व्यक्ति कमजोर आत्मबल के वजह से हमेशा संशय में रहता है और इसी उधेड़बुन में वह कोई कार्य शुरू नहीं कर पाता, जिसका परिणाम यह होता है कि वह जहां का तहां ही रह जाता है. ऐसे ज्योतिषी या गुरुओं को भी जातकों की मदद करने में बड़ी कठिनाई होती है, कारण संशय की अधिकता और आत्मविश्वास की कमी, असफलता को निमंत्रण देती है. ऐसे व्यक्ति के प्रगति और विकास के मार्ग अवरूद्ध रहते हैं और उसका सम्पूर्ण जीवन बिना कुछ उपलब्धि प्राप्त किए बीत जाता है. वह न स्वयं कुछ प्राप्त कर पाता है और न ही इस संसार को कुछ दे पाता है.
आत्मविश्वास एक अद्भुत शक्ति
इसलिए जन्मपत्री अनुसार ग्रहों का उपाय आवश्यक माना गया है ताकि व्यक्ति संशयमुक्त होकर अपना आत्मविश्वास जागृत कर अपनी बिखरी हुई शक्तियों को संगठित कर सफलता प्राप्त करे. बता दें कि आत्मविश्वास वह अद्भुत शक्ति है जिसके बल पर एक अकेला मनुष्य हजारों विपत्तियों एवं शत्रुओं का सामना कर लेता है. जब तक मन में यह दृढ़ विश्वास पैदा न हो कि आप जिस वस्तु को पाना चाहते हैं, उसे पा लेंगे, तब तक आपके मन में वह अटूट निष्ठा पैदा नहीं हो सकती जो उस वस्तु को प्राप्त करने के लिए आवश्यक होती है.