Laghu Vajrasana: दिखने में आसान लेकिन बेहद कठिन है ये योगासन, रीढ़ से लेकर मांसपेशियों तक के लिए माना जाता है फायदेमंद

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Laghu Vajrasana: योग भारतीय संस्कृति का सदियों पुराना हिस्सा है, जिसे शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. योग के अलग-अलग आसनों में कुछ सरल होते हैं, तो कुछ ऐसे भी होते हैं जिन्हें करने के लिए शरीर में अच्छा लचीलापन और संतुलन जरूरी होता है. लघु वज्रासन भी ऐसा ही एक उन्नत योगासन है. नाम में भले ही ‘लघु’ यानी छोटा शब्द जुड़ा हो, लेकिन इसे करना बिल्कुल आसान नहीं है. यह आसन खास तौर पर रीढ़ की हड्डी, पीठ, जांघों, कूल्हों, छाती, गर्दन और कंधों पर असर डालता है.

क्या है लघु वज्रासन?

लघु वज्रासन संस्कृत के तीन शब्दों से मिलकर बना है – ‘लघु’, जिसका अर्थ छोटा, हल्का या कोमल होता है, ‘वज्र’, जिसका संबंध बिजली, हीरे या इंद्र के वज्र से है और ‘आसन’ यानी शरीर की मुद्रा. अंग्रेजी में इसे Little Thunderbolt Pose कहा जाता है. इस आसन में शरीर को पीछे की तरफ मोड़ा जाता है. इसे करते समय छाती को खोलना पड़ता है, जबकि जांघों की मांसपेशियों में गहरा खिंचाव महसूस हो सकता है. इसके अलावा सिर को शरीर के पीछे जमीन के करीब ले जाने के लिए कंधों और गर्दन में पर्याप्त ताकत और लचीलापन होना जरूरी है.

रीढ़ की हड्डी के लिए माना जाता है फायदेमंद

आयुष मंत्रालय के अनुसार, लघु वज्रासन एक उन्नत बैक-बेंडिंग योग मुद्रा है. इसे रीढ़ की हड्डी और पीठ के लचीलेपन के लिए लाभकारी माना जाता है. इस आसन के दौरान जांघों, कूल्हों, छाती, हाथों, गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव आता है. नियमित अभ्यास से इन हिस्सों में लचीलापन और मूवमेंट की रेंज बेहतर करने में मदद मिल सकती है.

छाती और डायाफ्राम को खोलने में मदद

लघु वज्रासन में शरीर पीछे की ओर झुकता है, जिससे छाती का हिस्सा खुलता है. इस वजह से डायाफ्राम पर भी असर पड़ता है और गहरी सांस लेने में आसानी हो सकती है. इसके अलावा योगाभ्यास के दौरान शरीर को एक निश्चित मुद्रा में बनाए रखने से मानसिक एकाग्रता पर भी काम होता है.

कैसे करें लघु वज्रासन?

लघु वज्रासन का अभ्यास करते समय शरीर का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है. इसे करने के लिए सबसे पहले सामान्य वज्रासन की स्थिति में बैठें. इसके बाद घुटनों के बल खड़े हो जाएं. अब धीरे-धीरे शरीर को पीछे की ओर झुकाना शुरू करें. अपनी क्षमता के अनुसार सिर के ऊपरी हिस्से को जमीन या पैरों के तलवों की ओर ले जाने का प्रयास करें. संतुलन बनाए रखने के लिए हाथों से घुटनों या टखनों को पकड़ सकते हैं.

इस स्थिति में शरीर को स्थिर रखते हुए सामान्य गति से सांस लेते रहें. इस आसन को करते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. शरीर में जितना लचीलापन हो, उसी के अनुसार पीछे की ओर झुकना बेहतर है.

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

लघु वज्रासन एक कठिन और उन्नत योग मुद्रा है. अगर घुटनों, टखनों या कमर में गंभीर दर्द है तो इस आसन से बचना चाहिए. शुरुआत करने वाले लोगों को इसे बिना मार्गदर्शन के करने के बजाय किसी विशेषज्ञ योग गुरु की देखरेख में अभ्यास करना चाहिए. सही तकनीक और शरीर की क्षमता के अनुसार अभ्यास करना जरूरी है, क्योंकि गलत तरीके से किए जाने पर कठिन बैक-बेंडिंग आसन में चोट का जोखिम बढ़ सकता है.

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