Workplace Boundaries: आज के तेज रफ्तार दौर में करियर में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ मेहनत करना काफी नहीं है, बल्कि समझदारी से काम करना भी उतना ही जरूरी हो गया है. स्मार्ट वर्क के जरिए ही आप न सिर्फ बेहतर नतीजे हासिल कर सकते हैं, बल्कि एक संतुलित वर्क-लाइफ बैलेंस भी बना सकते हैं. लेकिन अक्सर लोग अपनी काबिलियत साबित करने की कोशिश में हर काम के लिए “हां” कह देते हैं और अपनी सीमाएं तय करना भूल जाते हैं.
कुछ समय बाद यही आदत काम के बोझ, तनाव और मानसिक थकान का कारण बन जाती है. जब आप बार-बार अपनी क्षमता से ज्यादा जिम्मेदारी उठा लेते हैं, तो इसका सीधा असर आपकी परफॉर्मेंस और मेंटल हेल्थ पर पड़ता है. यही वजह है कि वर्कप्लेस पर हेल्दी बाउंड्री बनाना बेहद जरूरी हो जाता है. यह न सिर्फ आपको मानसिक रूप से स्वस्थ रखता है, बल्कि लंबे समय में आपके करियर को भी मजबूत बनाता है.
आइए जानते हैं कि आप अपने ऑफिस और प्रोफेशनल लाइफ में हेल्दी वर्कप्लेस बाउंड्री कैसे सेट कर सकते हैं और खुद को ओवरवर्क और स्ट्रेस से कैसे बचा सकते हैं.
अपनी प्राथमिकताओं को पहचानें
बाउंड्री तय करने की शुरुआत इस बात से होती है कि आप खुद यह समझें कि आपके लिए सबसे जरूरी क्या है. अपने सभी कामों की एक लिस्ट बनाएं और यह तय करें कि कौन-से टास्क आपके करियर गोल्स से जुड़े हैं. जब आप अपनी प्राथमिकताओं को शुरू से ही स्पष्ट रखते हैं, तो सामने वाले लोगों के लिए भी आपकी सीमाओं को समझना और उनका सम्मान करना आसान हो जाता है.
हर बार ‘हां’ कहना बंद करें, ‘ना’ कहना सीखें
हर काम के लिए ‘हां’ कहना आपको एक टीम प्लेयर तो दिखा सकता है. लेकिन, यह आपके काम की क्वालिटी को कम कर देता है. आपके पास अगर पहले से ही काम का बोझ है, तो नए काम के लिए मना करना सीखें. सीधा ना कहने की जगह आप इसे इस ढंग से कह सकते हैं- “मैं इस प्रोजेक्ट में मदद करना चाहता हूं, लेकिन फिलहाल मेरे पास पहले से ही किसी दूसरे काम को कमीटेड हूं. इसलिए इसे अभी समय नहीं दे पाऊंगा.”
वर्किंग आवर्स का करें सम्मान
डिजिटल दौर में ऑफिस का काम अब घर तक पहुंच गया है, इसलिए अपनी सीमाएं तय करना और भी जरूरी हो गया है. ऑफिस के बाद ईमेल और मैसेज का जवाब देने के लिए एक तय समय रखें और उसके बाद वर्क नोटिफिकेशन बंद कर दें. अगर आप छुट्टी पर हैं, तो अपने ‘आउट ऑफ ऑफिस’ रिप्लाई को एक्टिव रखें, ताकि सहकर्मियों को पता रहे कि आप उपलब्ध नहीं हैं.
बातचीत में रखें स्पष्टता
अपनी सीमाओं के बारे में अपने मैनेजर और सहकर्मियों से खुलकर बात करें. अगर आपको देर रात मीटिंग्स से परेशानी है या आप लंच ब्रेक के दौरान काम नहीं करना चाहते, तो अपनी बात को साफ लेकिन प्रोफेशनल तरीके से शेयर करें. बातचीत की कमी अक्सर गलतफहमियों को जन्म देती है.
पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को रखें अलग
ऑफिस में अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी उतनी ही बातें साझा करें, जितनी वास्तव में जरूरी हों. सहकर्मियों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखना जरूरी है, लेकिन अपनी व्यक्तिगत समस्याओं या बहुत निजी जानकारी को वर्कप्लेस से दूर रखना एक अहम बाउंड्री है. इससे आप अनावश्यक ऑफिस गॉसिप और ड्रामे से भी बचे रहते हैं.