New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में मौत की सजा पाए दोषी अहमद बावा अब्बू अबूबकर बरेलवी की याचिका पर नोटिस जारी किया है. इसी के साथ उसकी फांसी की सजा की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है. बरेलवी ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें उसके दोषी होने और मौत की सजा को बरकरार रखा गया था. अब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका में उठाए गए कानूनी आधारों पर आगे सुनवाई करेगा.
पूरी तरह साजिश के आधार पर दोषी ठहराया
सुनवाई के दौरान दोषी की ओर से पेश वकील ने कहा कि उसे पूरी तरह साजिश के आधार पर दोषी ठहराया गया है. अदालत ने इस दलील को सुनने के बाद मामले में नोटिस जारी करने का आदेश दिया और सजा पर अमल रोकने की बात कही. अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट का मामला देश के चर्चित आतंकी मामलों में शामिल रहा है. इस मामले में निचली अदालत के फैसले के बाद गुजरात हाई कोर्ट ने भी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखा था.
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
अब बरेलवी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उसकी याचिका पर सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली पीठ ने की. पीठ में जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल थे. सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुवाद का मुद्दा भी सामने आया. बचाव पक्ष की ओर से बताया गया कि ट्रायल कोर्ट के कई दस्तावेज स्थानीय भाषा में हैं. ऐसे में गुजरात हाई कोर्ट के फैसले का अनुवाद उपलब्ध कराने के लिए भी आवेदन दिया गया है.
दोषसिद्धि पूरी तरह साजिश
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बरेलवी की ओर से पेश वकील ने कहा कि दोषसिद्धि पूरी तरह साजिश के आधार पर हुई है. बचाव पक्ष का कहना है कि मामले में उसके खिलाफ लगाए गए कानूनी आधारों पर शीर्ष अदालत में सुनवाई की जरूरत है. इसी दौरान वकील ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले के अनुवाद की जरूरत भी बताई. उनका कहना था कि ट्रायल कोर्ट से जुड़े दस्तावेज स्थानीय भाषा में हैं. इसलिए पूरे मामले को समझने के लिए इन दस्तावेजों का अनुवाद जरूरी है.
सजा के क्रियान्वयन पर रोक रखने का आदेश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किया. पीठ ने सजा के क्रियान्वयन पर रोक रखने का आदेश भी दिया. इसका मतलब है कि इस स्तर पर बरेलवी की मौत की सजा पर अमल नहीं किया जाएगा. अब मामले की अगली सुनवाई में याचिका में उठाए गए कानूनी सवालों पर अदालत विचार करेगी. गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली इस याचिका पर आगे की कार्यवाही के बाद ही मामले की स्थिति को लेकर तस्वीर और साफ होगी.
गुजरात हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती
बरेलवी की याचिका में गुजरात हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा बरकरार रखी गई थी. अब सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला है. अदालत याचिका में उठाए गए कानूनी आधारों और बचाव पक्ष की दलीलों पर आगे विचार करेगी. फिलहाल शीर्ष अदालत ने फांसी की सजा के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया है. मामले की अगली सुनवाई में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी.
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