अर्का एयरोस्पेस ने बनाया घातक हथियार U.K.I.D., हवा में ही टकराकर तबाह करेगा दुश्मन के ड्रोन

New Delhi: हैदराबाद की अर्का एयरोस्पेस ने U.K.I.D. यानी Universal Kinetic Interceptor Drones को पेश किया है. कंपनी इसे एक ऑटोनॉमस हाई-स्पीड इंटरसेप्टर ड्रोन कॉन्सेप्ट बता रही है. यह ऐसा ड्रोन है जिसे दूसरे ड्रोन को पकड़ने और हवा में ही उसे फिजिकल इंपैक्ट से नष्ट करने के लिए तैयार किया जा रहा है. IDRW की रिपोर्ट के अनुसार U.K.I.D. का आइडिया इसलिए दिलचस्प है क्योंकि इसमें ड्रोन से ड्रोन का मुकाबला कराने की सोच दिखाई देती है.

UAS यानी अनमैंड एरियल सिस्टम

खतरा आसमान में है तो जवाब भी आसमान से ही आएगा. कंपनी के मुताबिक यह सिस्टम आने वाले UAS यानी अनमैंड एरियल सिस्टम को पहचानने, ट्रैक करने और इंटरसेप्ट करने के लिए ऑटोनॉमस गाइडेंस का इस्तेमाल कर सकता है. इसमें AI-पावर्ड गाइडेंस की बात कही गई है, जिससे ऑपरेटर को हर छोटे मूवमेंट पर मैनुअली कंट्रोल करने की जरूरत कम हो सकती है. खास बात यह है कि U.K.I.D. को अकेले इंटरसेप्टर के तौर पर ही नहीं, बल्कि कई ड्रोन के स्वार्म के रूप में काम करने के लिए भी डिजाइन किया गया है.

कम लागत वाले ड्रोन की संख्या बहुत ज्यादा

पारंपरिक एयर डिफेंस में किसी हवाई खतरे को रोकने के लिए मिसाइल या दूसरे महंगे हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन छोटे और कम लागत वाले ड्रोन की संख्या बहुत ज्यादा हो तो हर ड्रोन पर महंगा इंटरसेप्टर इस्तेमाल करना हमेशा किफायती विकल्प नहीं होता. यहीं पर U.K.I.D. जैसी तकनीक की जरूरत समझ आती है. इसका मकसद किसी मिसाइल की जगह एक समर्पित इंटरसेप्टर ड्रोन को खतरे की तरफ भेजना है. यह दुश्मन के UAV के करीब पहुंचकर काइनेटिक इफेक्ट के जरिए उसे रोकने के कॉन्सेप्ट पर काम करता है.

फुर्तीले मैन्यूवर की क्षमता पर जोर

कंपनी के अनुसार U.K.I.D. में तेज एक्सेलेरेशन और फुर्तीले मैन्यूवर की क्षमता पर जोर दिया गया है. इसका मतलब यह है कि इंटरसेप्टर को ऐसे टारगेट के खिलाफ काम करने के लिए तैयार किया जा रहा है जो खुद भी तेज गति से दिशा बदल सकता है. किसी छोटे ड्रोन को हवा में पकड़ना आसान काम नहीं होता. इसके लिए सिर्फ स्पीड काफी नहीं है. सेंसर से टारगेट की जानकारी, ट्रैकिंग, सही समय पर दिशा बदलना और इंटरसेप्शन के लिए लगातार फैसला लेना जरूरी होता है. U.K.I.D. का कॉन्सेप्ट इसी पूरी प्रक्रिया को ज्यादा ऑटोनॉमस बनाने की दिशा में है.

AI-पावर्ड गाइडेंस क्षमता

U.K.I.D. की सबसे अहम बात इसकी AI-पावर्ड गाइडेंस क्षमता बताई गई है. कंपनी के मुताबिक सिस्टम स्वायत्त तरीके से टारगेट को डिटेक्ट और ट्रैक कर सकता है. इसके बाद इंटरसेप्टर को खतरे की दिशा में ले जाने की प्रक्रिया ज्यादा ऑटोमेटेड हो सकती है. यहां ऑटोनॉमस का मतलब यह नहीं है कि इंसान की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाती है. असल ऑपरेशनल सिस्टम में कमांड और कंट्रोल, नियम और सुरक्षा प्रोटोकॉल बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे.

डिफेंस नेटवर्क के साथ जोड़ने की भी संभावना

इस सिस्टम को अलग-अलग सेंसर और डिफेंस नेटवर्क के साथ जोड़ने की भी संभावना रखी गई है. कंपनी के कॉन्सेप्ट के मुताबिक U.K.I.D. रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम तथा कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क से जुड़ सकता है. इससे किसी खतरे की जानकारी सिर्फ एक सेंसर तक सीमित नहीं रहेगी. अलग-अलग स्रोतों से मिली जानकारी को एक साथ इस्तेमाल करके इंटरसेप्टर को टारगेट तक पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है.

इसे भी पढ़ें. CM योगी को छात्राओं ने बांधी राखी: सीएम की बच्चों को सलाह, स्मार्टफोन से बनाएं दूरी

More Articles Like This

Exit mobile version