दशहरे पर बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा ऐलान, भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का लिया संकल्प

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Bageshwar Baba : इस नवरात्रि में बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नवरात्रि के नौ दिन कठिन व्रत और साधना के बाद भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया. जानकारी देते हुए बता दें कि उन्‍होंने नौ दिन तक जनकल्याण और आध्यात्मिक साधना में लीन रहने के बाद दसवें दिन केन नदी के तट पर स्नान कर भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ाया और व्रत पूर्ण किया.

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार उनकी सुरक्षा के लिए इस अवसर पर खजुराहो एसडीओपी मनमोहन सिंह बघेल, थाना प्रभारी बमीठा आशुतोष श्रोत्रिय और चंद्र नगर चौकी प्रभारी सहित भारी पुलिस बल तैनात था. इसके साथ ही धीरेंद्र शास्त्री के दर्शन के लिए आसपास के ग्रामीणों की बड़ी संख्या भी जुटी रही.

भक्तों में उत्साह और देशभक्ति की भावना

ऐसे में इसे लेकर बनारस के विद्वान आचार्य राजा पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि नवरात्रि के दौरान बागेश्वर धाम में शतचंडी यज्ञ का आयोजन किया गया. उन्‍होंने ये भी बताया कि धीरेंद्र शास्त्री ने नौ दिनों तक व्रत और साधना के साथ देश और समाज के कल्याण की प्रार्थना की और उन्होंने लोगों को संदेश देते हुए कहा कि देश की समृद्धि और हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए हर नागरिक को जागरूक होना चाहिए. बता दें कि नवरात्रि के दौरान उनके द्वारा लिए गए संकल्‍प ने साधकों और भक्तों में उत्साह और देशभक्ति की भावना को और बढ़ा दिया.

देवताओं का विधि विधान से किया पूजन

प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक, नवरात्रि के दसवें दिन केन नदी के तट पर धीरेंद्र शास्त्री ने जल, थल और वायु देवताओं का विधि विधान से पूजन किया. इसके साथ ही उन्‍होंने भगवान शिव को जल अर्पित किया और उन्होंने बुंदेली व्यंजनों के साथ व्रत का पारण किया. बता दें कि पिछले वर्ष भी इसी प्रकार उन्‍होंने साधना पूरी कर केन नदी के तट पर स्नान किया था.

गाजे-बाजे के साथ माता का विसर्जन

बता दें कि नवरात्रि के पहले दिन स्थापित की गई माता की प्रतिमाओं का दसवें दिन अंतिम आरती और विसर्जन किया गया. उन्‍होंने बताया कि आरती के दौरान भक्ति भाव से ग्रामीण और विशेष रूप से महिलाएं भावुक दिखाई दीं. ऐसे में लोकेश गर्ग और बागेश्वर महाराज की माताजी ने माता रानी की आरती उतार कर आशीर्वाद लिया. इसके बाद पूरे विधि-विधान से प्रतिमाओं की शोभायात्रा के दौरान उन्हें गाजे-बाजे के साथ विसर्जन के लिए ले जाया गया.

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