Bihar Cabinet Expansion: बिहार की राजनीति में 7 मई एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही है. राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान सत्ता, रणनीति और सियासी ताकत का सबसे बड़ा केंद्र बनने वाला है, जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार होगा. इस भव्य समारोह को सिर्फ शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि एनडीए के बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है.
सबसे खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस समारोह में शामिल होने पटना पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे कार्यक्रम की राजनीतिक अहमियत और बढ़ गई है. पटना में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं और गांधी मैदान को हाई सिक्योरिटी जोन में बदला जा रहा है. दूसरी तरफ बिहार के सियासी गलियारों में सिर्फ एक ही चर्चा है— आखिर नई कैबिनेट में किसे जगह मिलेगी और किसका पत्ता कटेगा?
अमित शाह लगाएंगे अंतिम मुहर
नई कैबिनेट को लेकर चल रहा सस्पेंस अब अपने आखिरी दौर में पहुंच चुका है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज (बुधवार) पटना पहुंच रहे हैं, जहां बीजेपी और एनडीए नेताओं के साथ हाई लेवल बैठक होगी. इसी बैठक में मंत्रियों के नामों की फाइनल लिस्ट पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी.
27 मंत्री लेंगे शपथ
सूत्रों के मुताबिक, गांधी मैदान में होने वाले इस भव्य समारोह में कुल 27 मंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ ले सकते हैं. एनडीए गठबंधन के सभी सहयोगी दलों को साधने और जातीय-सियासी संतुलन बनाए रखने के लिए खास फॉर्मूला तैयार किया गया है. माना जा रहा है कि बीजेपी के खाते में सबसे ज्यादा 12 मंत्री पद जा सकते हैं, जबकि जेडीयू को 11 मंत्री पद मिलने की संभावना है. इसके अलावा चिराग पासवान की लोजपा (रामविलास) को 2 मंत्री पद दिए जा सकते हैं. वहीं जीतन राम मांझी की HAM पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा की RLM को भी एक-एक मंत्री पद मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है.
नीतीश कुमार की भूमिका सबसे अहम
इस पूरे कैबिनेट विस्तार में जेडीयू अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है. सूत्रों का कहना है कि मंत्री पदों के चयन में उनकी राय को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद ही अंतिम नाम तय होंगे.
बिहार की राजनीति पर रहेगी पूरे देश की नजर
7 मई को होने वाला यह आयोजन बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. पीएम मोदी, अमित शाह और एनडीए के तमाम बड़े नेताओं की मौजूदगी इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर का राजनीतिक संदेश देने वाला बना सकती है. अब पूरे बिहार की नजर उस फाइनल लिस्ट पर टिकी हुई है, जो तय करेगी कि नई सरकार में किस नेता को सत्ता का सबसे बड़ा इनाम मिलेगा.
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