वरिष्ठ पत्रकार मार्क टुली का 90 साल की उम्र में निधन, किस PM के फैसले के विरोध में छोड़ना पड़ था भारत..?

New Delhi: इंदिरा गांधी के आपातकाल लगाने के फैसले का विरोध करने वाले वरिष्ठ पत्रकार मार्क टुली का रविवार को 90 साल की उम्र में दिल्ली के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया है. लंबे समय तक भारत में BBC दिल्ली के अध्यक्ष रहे टुली के निधन की पुष्टी उनके दोस्त और पत्रकार सतीश जैकब ने की. जैकब के मुताबिक टुली पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे और एक सप्ताह से मैक्स अस्पताल में भर्ती थे.

जुलाई 1994 में BBC से दिया था इस्तीफा

24 अक्टूबर 1935 को कोलकाता में जन्मे टुली ने 22 वर्षों तक BBC नई दिल्ली के ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्य किया. उन्होंने जुलाई 1994 में BBC से इस्तीफा दिया था. इसके बाद वे नई दिल्ली से एक स्वतंत्र पत्रकार के रूप में कार्य करने लगे. वे न केवल एक प्रतिष्ठित पत्रकार थे बल्कि BBC रेडियो 4 के कार्यक्रम समथिंग अंडरस्टुड के प्रस्तुतकर्ता भी रहे.

कई अहम और बड़े बदलाव के दौरान रिपोर्टिंग

मार्क टुली ने भारत में हुए कई अहम और बड़े बदलाव के दौरान रिपोर्टिंग की थी. इनमें 1975 में इंदिरा गांधी के आपातकाल लगाने के फैसले की जब मार्क टुली ने आलोचना की तो सरकार ने उन्हें भारत छोड़ने का आदेश दे दिया. जिसके बाद टुली कुछ समय के लिए दोबारा भारत आए. इसी तरह जब 1977 में मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने और 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हुई तो उस समय भी टुली ने अहम रिपोर्टिंग की.

उत्कृष्ट योगदान के लिए कई बार सम्मानित

मार्क टुली को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए कई बार सम्मानित किया गया. उन्हें 2002 में नाइटहुड की उपाधि से सम्मानित किया गया और 2005 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से नवाजा गया. लेखक के रूप में टुली ने भारत पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं, जिनमें नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया, इंडिया इन स्लो मोशन और द हार्ट ऑफ इंडिया शामिल हैं.

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