Delhi Pollution: दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ता वायु प्रदूषण अब आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है. डॉक्टरों के अनुसार हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM 2.5) गर्भवती महिलाओं के शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं. इससे खून गाढ़ा हो जाता है और गर्भ में पल रहे शिशु तक ऑक्सीजन व पोषण की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती. परिणामस्वरूप बच्चे के विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है और उसकी ग्रोथ प्रभावित हो सकती है.
क्यों बढ़ रही ब्लड थिनर दवाओं की जरूरत
विशेषज्ञ बताते हैं कि जहरीली हवा खून में थक्के बनने का खतरा बढ़ा देती है. प्रदूषण से फाइब्रिनोजेन नामक प्रोटीन का स्तर बढ़ जाता है, जो थक्का बनाने में अहम भूमिका निभाता है. इसी वजह से कई महिलाओं में एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम जैसी दिक्कतें सामने आ रही हैं. IVF से मां बनने वाली महिलाओं या ज्यादा उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं को भी हाई ब्लड प्रेशर से बचाने के लिए ब्लड थिनर दवाएं दी जा रही हैं.
प्रदूषण से बचाव के उपाय
डॉक्टरों ने गर्भवती महिलाओं को यथासंभव घर के अंदर रहने की सलाह दी है. यदि बाहर जाना अनिवार्य हो तो सामान्य मास्क के बजाय N-95 मास्क का उपयोग करें. घर की हवा स्वच्छ रखने के लिए रसोई में एग्जॉस्ट फैन लगाएं और अगरबत्ती या धूपबत्ती जलाने से परहेज करें. एयर-प्यूरीफाइंग पौधे भी इनडोर वायु गुणवत्ता सुधारने में सहायक हो सकते हैं. साथ ही धूम्रपान और धुएं वाले वातावरण से दूरी बनाए रखना बेहद आवश्यक है.
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ता प्रदूषण और अस्वस्थ जीवनशैली गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं. हालांकि समय रहते सावधानी बरतने, नियमित जांच और उचित उपचार से मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है.
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