भारत ने बनाया ‘KAL’ ड्रोन, शाहेद और गेरान-2 को देगा मात, 1000 KM दूर दुश्मन को करेगा पस्त

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New Delhi: यूक्रेन युद्ध में रूस के गेरान-2 और ईरान के शाहेद-136 ड्रोन ने दुनिया का ध्यान खींचा है. अब भारत भी इस क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. नोएडा की डिफेंस कंपनी IG Defence ने KAL नाम का लंबी दूरी वाला कॉम्बैट ड्रोन विकसित किया है. कंपनी का दावा है कि यह ड्रोन 1000 किलोमीटर दूर तक हमला कर सकता है. इसकी खासियत यह है कि यह सिर्फ तय जगह पर हमला करने के बजाय उड़ान के दौरान निगरानी भी कर सकता है.

शाहेद और गेरान-2 जैसे ड्रोन से ज्यादा प्रभावी

कंपनी का मानना है कि यही खूबी इसे शाहेद और गेरान-2 जैसे ड्रोन से ज्यादा प्रभावी बना सकती है. IDRW की रिपोर्ट के अनुसार KAL 7 से 8 घंटे तक हवा में रह सकता है और अपने साथ 50 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकता है. इसमें दिन में तस्वीरें लेने वाला हाई-डेफिनिशन कैमरा और रात में या कम रोशनी में देखने वाला थर्मल इमेजर लगाया गया है. इसके साथ एन्क्रिप्टेड रेडियो डेटा लिंक और वैकल्पिक सैटेलाइट कम्युनिकेशन की सुविधा भी बताई गई है.

आसपास की स्थिति पर नजर रखने की क्षमता

यानी यह ड्रोन टारगेट तक पहुंचने के दौरान सिर्फ उड़ान नहीं भरेगा बल्कि आसपास की स्थिति पर नजर रखने की क्षमता भी रखेगा. हालांकि कंपनी के दावों और युद्धक्षेत्र में इसके वास्तविक प्रदर्शन के बीच अंतर हो सकता है. खासकर चलते हुए और सुरक्षा घेरे में मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता का अभी स्वतंत्र परीक्षण जरूरी है. नोएडा स्थित IG Defence ने KAL को लंबी दूरी के हमलों के लिए तैयार किया है. कंपनी के मुताबिक इसकी रेंज करीब 1000 किलोमीटर है.

अलग-अलग तरह के मिशन के लिए उपयोगी

यह 7-8 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है. 50 किलोग्राम का पेलोड ले जाने की क्षमता इसे अलग-अलग तरह के मिशन के लिए उपयोगी बना सकती है. इसकी सबसे अहम विशेषता इसका सेंसर पैकेज है. इसमें 1920 x 1080 रेजोल्यूशन वाला डे-लाइट कैमरा और 640 x 512 क्षमता वाला थर्मल इमेजर लगाया गया है. इससे दिन और रात दोनों समय निगरानी की जा सकती है.

सैटेलाइट कम्युनिकेशन का विकल्प भी मौजूद

KAL में एन्क्रिप्टेड रेडियो फ्रीक्वेंसी डेटा लिंक दिया गया है. इसके अलावा जरूरत के हिसाब से सैटेलाइट कम्युनिकेशन का विकल्प भी मौजूद है. इसकी नेविगेशन प्रणाली में इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम यानी INS और मल्टी-बैंड सैटेलाइट नेविगेशन का इस्तेमाल किया गया है. इसमें कंट्रोल्ड रिसेप्शन पैटर्न एंटीना भी दिया गया है जो सिग्नल में बाधा और जामिंग के असर को कम करने में मदद कर सकता है.

लक्ष्यों को निशाना बनाने की संभावना

इन खूबियों का फायदा यह है कि ड्रोन उड़ान के दौरान लक्ष्य की तस्वीरें और दूसरी अहम जानकारियां जुटा सकता है. अगर मिशन के दौरान उसे नए निर्देश देने की सुविधा प्रभावी ढंग से काम करती है तो वह अपनी योजना में बदलाव भी कर सकता है. इससे चलते हुए सैन्य वाहनों या मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम जैसे लक्ष्यों को निशाना बनाने की संभावना बढ़ सकती है. हालांकि यह क्षमता सेंसर की गुणवत्ता और संचार व्यवस्था की विश्वसनीयता पर निर्भर करेगी.

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