ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए ट्रंप ने भारत को दी रूसी तेल खरीदने की छूट : व्हाइट हाउस

Divya Rai
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Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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India Oil Crisis: व्हाइट हाउस ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे यूएस मिलिट्री कैंपेन से पैदा हुई दिक्कतों के बीच ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने की एक बड़ी कोशिश के तहत डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए तत्कालीन छूट को मंजूरी दी है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह फैसला प्रेसिडेंट, ट्रेजरी डिपार्टमेंट और नेशनल सिक्योरिटी टीम के सदस्यों के बीच बातचीत के बाद लिया गया.

भारत को दी रूसी तेल खरीदने की छूट

लेविट ने एक सवाल के जवाब में रिपोर्टर्स से कहा, “प्रेसिडेंट और ट्रेजरी सेक्रेटरी और पूरी नेशनल सिक्योरिटी टीम इस फैसले पर इसलिए पहुंची क्योंकि भारत में हमारे सहयोगी अच्छे रहे हैं और उन्होंने पहले भी रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है.” उन्होंने कहा कि यह तत्कालीन उपाय ईरान के संकट से पैदा हुई ग्लोबल तेल सप्लाई में रुकावटों को दूर करने के लिए था. लेविट ने आगे कहा, “जब हम ईरानियों की वजह से दुनिया भर में तेल सप्लाई के इस ‘टेम्पररी गैप’ को कम करने के लिए काम कर रहे हैं, तो हमने उन्हें तत्कालीन तौर पर रूसी तेल लेने की इजाजत दे दी है.”

छूट मिलने से पहले ही शिपमेंट भेज दिए गए थे India Oil Crisis

लेविट ने बताया कि छूट मिलने से पहले ही शिपमेंट भेज दिए गए थे. व्हाइट हाउस के मुताबिक, प्रशासन को उम्मीद नहीं है कि इस व्यवस्था से मॉस्को को आर्थिक रूप से कोई खास फायदा होगा. यह बात तब आई जब व्हाइट हाउस ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ पर अपडेट दिया, जो ईरान के मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर और नेवल क्षमता को टारगेट करने वाला यूएस मिलिट्री कैंपेन है. लेविट ने कहा कि दस दिन पहले शुरू होने के बाद से ऑपरेशन में तेजी से प्रोग्रेस हुई है. अब तक 5,000 से ज्यादा दुश्मन के ठिकानों पर हमला किया जा चुका है.

ईरानी नेवी को ‘लड़ाई में बेअसर’ माना गया है

उन्होंने आगे कहा कि ईरान की जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता में तेजी से गिरावट आई है. ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू होने के बाद से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमले 90 प्रतिशत से ज्यादा कम हो गए हैं, और उनके ड्रोन हमले लगभग 35 प्रतिशत कम हो गए हैं. अमेरिकी सेना ने ईरान के नेवल एसेट्स को भी निशाना बनाया है. लेविट ने कहा, “हमने 50 से ज्यादा ईरानी नेवल वेसल को नष्ट कर दिया है, जिसमें एक बड़ा ड्रोन कैरियर शिप भी शामिल है. ईरानी नेवी को ‘लड़ाई में बेअसर’ माना गया है.

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बताए मकसद

लेविट ने कहा, “‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के बताए गए मकसद वही हैं. बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करना, उनकी ईरानी मिसाइल इंडस्ट्री को जमीन पर गिराना, यह पक्का करना कि उनके आतंकवादी प्रॉक्सी अब इस इलाके को अस्थिर न कर सकें, और यह पक्का करना कि ईरान को कभी न्यूक्लियर वेपन न मिले.” व्हाइट हाउस ने इस बात पर भी जिक्र किया कि यूनाइटेड स्टेट्स दुनिया के सबसे जरूरी तेल शिपिंग रूट्स में से एक, होर्मुज स्ट्रेट के जरिए एनर्जी का लगातार फ्लो पक्का करेगा. लेविट ने कहा कि ट्रंप ने एनर्जी सप्लाई रूट्स की सुरक्षा के लिए अपना वादा दोहराया है. उन्होंने कहा, “डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट से तेल का बहाव बनाए रखने के लिए अपना वादा दोहराया है ताकि यूनाइटेड स्टेट्स और हमारे सभी साथी अपनी एनर्जी जरूरतें पूरी कर सकें.”

ये भी पढ़ें- ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी, कहा-होर्मुज जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाने का प्रयास किया तो सैन्य परिणाम भुगतने होंगे

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