Kakanmath Temple: बिना सीमेंट-चूने के बना 120 फीट ऊंचा मंदिर, जिसे लोग कहते हैं ‘भूतों का मंदिर’

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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कहां स्थित है ककनमठ मंदिर?

ककनमठ मंदिर मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सिहौनिया कस्बे में स्थित है. यह मंदिर दूर से ही अपनी विशाल ऊंचाई और अनोखी बनावट के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करता है. करीब 120 फीट ऊंचे इस मंदिर को देखकर पहली नजर में विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि इसके निर्माण में न तो सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है और न ही चूने का. मंदिर को विशाल पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर संतुलित तरीके से रखकर बनाया गया है.

सबसे हैरानी की बात यह है कि सदियों से आने वाले बड़े-बड़े तूफान भी इसकी नींव को हिला नहीं सके. समय के साथ आसपास मौजूद कई प्राचीन संरचनाएं नष्ट हो गईं, लेकिन ककनमठ मंदिर आज भी मजबूती के साथ खड़ा हुआ है.

आखिर किसने बनवाया था यह मंदिर?

ककनमठ मंदिर को लेकर कई तरह की मान्यताएं और लोककथाएं प्रचलित हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण इंसानों ने नहीं बल्कि भूतों ने किया था. कहा जाता है कि भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर को भूतों ने सिर्फ एक ही रात में बनाना शुरू किया था. पूरी रात तेजी से निर्माण कार्य चलता रहा, लेकिन सूर्योदय होने से पहले मंदिर का निर्माण पूरा नहीं हो सका और काम अधूरा ही रह गया.

यही कारण है कि आज भी लोग इसे ‘भूतों का मंदिर’ कहकर पुकारते हैं. हालांकि इन कथाओं के पीछे कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, लेकिन आज भी स्थानीय लोग इन कहानियों पर विश्वास करते हैं.

इतिहास क्या कहता है?

इतिहासकारों के अनुसार ककनमठ मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में हुआ था. माना जाता है कि उस समय कछवाहा वंश के राजा कीर्ति सिंह ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था. एक प्रचलित मान्यता के अनुसार राजा की पत्नी ककनावती भगवान शिव की परम भक्त थीं. आसपास कोई बड़ा शिव मंदिर नहीं होने के कारण राजा ने उनकी इच्छा पूरी करने के लिए इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया. कहा जाता है कि रानी ककनावती के नाम पर ही इस मंदिर का नाम ककनमठ पड़ा.

वैज्ञानिकों के लिए भी बना हुआ है रहस्य

ककनमठ मंदिर को देखकर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर इसका निर्माण कैसे किया गया होगा. मंदिर में लगे विशाल पत्थरों को देखकर यह समझना मुश्किल हो जाता है कि सदियों पहले इन्हें इतनी ऊंचाई तक कैसे पहुंचाया गया होगा. कहा जाता है कि मंदिर में इस्तेमाल किए गए पत्थर आसपास के इलाके में नहीं पाए जाते.

ऐसे में उन्हें यहां तक लाया कैसे गया और बिना किसी आधुनिक तकनीक के इतनी विशाल संरचना कैसे तैयार की गई, यह आज भी रहस्य बना हुआ है. कई विशेषज्ञ और शोधकर्ता इस मंदिर का अध्ययन कर चुके हैं, लेकिन इसके निर्माण की पूरी तकनीक का स्पष्ट जवाब आज तक सामने नहीं आ पाया है.

खंडहर जैसी हालत, फिर भी उमड़ती है भीड़

समय के साथ मंदिर का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है. यहां मौजूद कई प्राचीन मूर्तियां टूट चुकी हैं और उनकी हालत जर्जर हो गई है. मंदिर से मिली कई महत्वपूर्ण मूर्तियों और अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए ग्वालियर के संग्रहालय में संरक्षित किया गया है. इसके बावजूद इस मंदिर के प्रति लोगों की आस्था और जिज्ञासा कम नहीं हुई है. हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं और इस रहस्यमयी मंदिर को करीब से देखने की इच्छा रखते हैं.

देखने में लगता है गिर जाएगा, लेकिन सदियों से अडिग है

ककनमठ मंदिर की संरचना को देखकर ऐसा लगता है जैसे यह किसी भी समय गिर सकता है. पत्थर बिना किसी जोड़ सामग्री के एक-दूसरे पर टिके हुए दिखाई देते हैं. लेकिन यही इस मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य भी है. हजारों साल बीत जाने के बाद भी यह मंदिर मजबूती से खड़ा हुआ है. यही वजह है कि इसे मध्य प्रदेश का अनोखा अजूबा कहा जाता है. इतिहास, आस्था और रहस्य का यह अद्भुत संगम आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है.

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