विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा से एंटी पेपर लीक बिल पास, जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

Divya Rai
Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Anti Paper Leak Amendment Bill: लोकसभा में हंगामे के बीच एंटी पेपर लीक संशोधन बिल पास हो गया है. विपक्ष के हंगामे के बाद इस बिल को ध्वनि मत से मंजूरी मिली. बिल पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष ने ज़ोरदार हंगामा किया. स्पीकर ओम बिरला ने बिल के पास होने का ऐलान करने के बाद लोकसभा की कार्यवाही कल सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी.

विपक्ष का आचरण बेहद निराशाजनक है: जितेंद्र सिंह

लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन बिल पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस बिल पर चर्चा करने के बजाए विपक्ष राजनीति कर रहा. उन्होंने कहा,  ‘विपक्ष का आचरण बेहद निराशाजनक है. पीएम मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाले इतने गंभीर और महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीति कर रहा है. विपक्ष के नेता ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह न केवल असंसदीय थी, बल्कि इतनी अनुचित थी कि मैं उसे दोहराना भी नहीं चाहूंगा. यदि कोई खुद को शिक्षित और संसदीय परंपराओं से परिचित मानता है, तो उसे पता होना चाहिए कि सदन के भीतर ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता.’

राहुल गांधी पर साधा निशाना Anti Paper Leak Amendment Bill

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने आगे कहा, ‘इस देश के युवाओं को, जो देश का भविष्य हैं, ‘मूर्ख’ कहना इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है. मुझे आश्चर्य होता है कि क्या उन्हें संसदीय कार्यवाही के बुनियादी नियमों और मर्यादाओं की भी जानकारी है.’ उन्होंने आगे कहा, ’21 जुलाई को विपक्ष के नेता शायद किसी विशेष सोच के कारण प्रधानमंत्री के आवास 7 एलकेएम के बाहर जाकर बैठ गए. ऐसा लगा मानो उनकी गहरी इच्छा थी कि देश उन्हें चुने और 7 एलकेएम में बैठाए. जब यह इच्छा पूरी नहीं हुई तो वे निराश और हताश होकर वहां के गेट पर जाकर बैठ गए. जब उन्हें विनम्रता से समझाया गया कि ऐसा व्यवहार उनके पद और कद के अनुरूप नहीं है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें बस वहां से हटा दिया जाए.’

गोली चलाने का अधिकार मंत्री का नहीं होता

उन्होंने कहा, ‘बार-बार स्पष्ट किया गया है कि कोई गोली नहीं चली. जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने के आदेश का सवाल ही नहीं उठता. इस तरह का आदेश देने का अधिकार मंत्री के पास नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है.’

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