PM Modi के नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे, सुभाषितम संदेश में कहा- राष्ट्र निर्माण के लिए ‘सेवाभाव’ हमारी अमूल्य पूंजी

Divya Rai
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Content Writer The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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PM Modi Government 12 Years: पीएम मोदी ने केंद्र सरकार में अपने नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे होने के खास अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विशेष ‘सुभाषितम’ संदेश शेयर किया है. जिसमें उन्होंने ‘राष्ट्र प्रथम’ और जन-सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है.

सुभाषितम संदेश किया शेयर

पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण और सेवाभाव हमारी अमूल्य पूंजी रही है. बीते 12 वर्षों में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से प्रेरित निरंतर प्रयासों से ही आज हम एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की ओर अग्रसर हैं.” इसके अलावा उन्होंने संस्कृत श्लोक ‘आर्यकर्मणि रज्यन्ते भूतिकर्माणि कुर्वते. हितं च नाभ्यसूयन्ति स वै पण्डित उच्यते॥’ भी शेयर किया है.

क्या है श्लोक का अर्थ PM Modi Government 12 Years

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि जो व्यक्ति सदैव श्रेष्ठ एवं सदाचारपूर्ण कर्मों में लगा रहता है, निरंतर उन्नति और लोककल्याण के कार्यों में संलग्न रहता है तथा दूसरों के हितकारी वचनों और कार्यों का सम्मान करता है, उनसे द्वेष नहीं करता, वही वास्तव में बुद्धिमान कहलाता है.

8 जून को भी शेयर किया था सुभाषित

8 जून को भी प्रधानमंत्री मोदी ने प्रकृति के साथ संतुलन बिठाने को लेकर संस्कृत सुभाषित शेयर किया था. उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा था, “प्रकृति के साथ संतुलन बिठाकर समस्त जीवों का कल्याण हो, यही हमारी संस्कृति की मूल भावना रही है. इसी व्यापक दृष्टि से आज भारतवर्ष प्रगति और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़ रहा है.” इसके साथ ही उन्होंने संस्कृत श्लोक ‘यावच्चतस्रः प्रदिशश्चक्षुर्यावत् समश्नुते. तावत् समैत्विन्द्रियं मयि तद्धस्तिवर्चसम्॥’ भी शेयर किया था.

जानें इसका अर्थ

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि चारों दिशाओं के विस्तार व नेत्रों की दृष्टि-शक्ति की जागरूकता से युक्त ऐसी समृद्धि हमें प्राप्त हो, जहां प्रकृति के साथ पूर्ण संतुलन में रहकर पर्यावरण का संरक्षण हो और समस्त जीवन का सतत कल्याण सुनिश्चित हो.

5 जून को भी सुभाषित शेयर किया था

पीएम मोदी ने 5 जून को भी सुभाषित शेयर किया था. उन्होंने प्रकृति के संरक्षण को लेकर सुभाषित शेयर करते हुए लिखा था कि प्रकृति का संरक्षण केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और संस्कारों का भी अभिन्न हिस्सा है. उन्होंने संस्कृत श्लोक शेयर करते हुए लिखा था कि मधु वाता ऋतायते मधु क्षरन्ति सिन्धवः. माध्वीर्नः सन्त्वोषधीः॥

क्या है इसका अर्थ

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि वायु हमारे लिए आनंददायक और कल्याणकारी रूप से प्रवाहित हो, नदियां जीवनदायिनी और पोषणकारी जल प्रदान करें तथा औषधियां और वनस्पतियां समस्त जीव जगत के लिए आरोग्य और सुख का कारण बने.

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