क्या है ‘नारी वंदन बिल’..? जिसे PM मोदी ने बताया ‘ऐतिहासिक कदम’, आखिर विपक्ष क्यों कर रहा विरोध!

New Delhi: संसद के चल रहे विशेष सत्र के दौरान गुरुवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश किया, जो एक महत्वपूर्ण विधायी कदम है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है. केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने प्रस्तावित संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) बिल, 2026 पेश करके बहस की शुरुआत की. इनका मकसद 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून-नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूरी तरह लागू करना है.

महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था

इन प्रस्तावों के तहत 2029 से लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी. महिलाओं को आरक्षण देने वाला कानून ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ सितंबर 2023 में पास हो चुका है, लेकिन अब कानून को संशोधन कर इसे 2029 से ही लागू किया जाएगा. महिला संगठनों और महिला सांसदों ने दशकों से महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग उठाई है.

भारत में महिलाओं का संसद में प्रतिनिधित्व काफ़ी कम

फिलहाल लोकसभा में 78 महिला सांसद (कुल सीटों का 14%) और राज्यसभा में 42 महिला सांसद (कुल सीटों का 18%) है. सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की एक प्रेस रिलीज़ मुताबिक़, दुनिया भर में महिला सांसदों का प्रतिनिधित्व औसतन 27.2% है. यानी भारत में महिलाओं का संसद में प्रतिनिधित्व दुनिया की तुलना में काफ़ी कम है.

महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित

2023 में भारत ने एक कानून पारित किया था, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित किया गया, लेकिन इसे जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू होना था. प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 में कहा गया है कि इससे हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं की “प्रभावी और समर्पित भागीदारी में देरी होगी”.

15 साल की अवधि के लिए वैध रहेगा यह आरक्षण

महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का रोटेशन हर डीलिमिटेशन साइकिल (परिसीमन चक्र) के बाद होगा. यह आरक्षण 15 साल की अवधि के लिए वैध रहेगा, जिसे संसद आगे बढ़ा सकती है. इस बिल को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि जो बिल का समर्थन नहीं करेगा, उसको घर में खाना नहीं मिलेगा. उनका कहना है कि अब महिलाओं से भेदभाव नहीं होगा.

कुछ ही महीनों में सरकार ने लिया यू-टर्न

हालांकि विपक्ष ने इसका विरोध जताते हुए कहा कि 2023 में जब यह बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पारित हुआ था, तब महिला संगठनों ने सरकार से पूछा था कि इसे लागू करने में देरी क्यों की जा रही है और इसे जनगणना और परिसीमन से क्यों जोड़ा गया है, लेकिन उस क़ानून में प्रावधान था कि जनगणना या परिसीमन के बिना महिला आरक्षण नहीं होगा. कुछ ही महीनों में सरकार ने यू-टर्न ले लिया है और अब वह कह रही है कि वह इसे जनगणना और परिसीमन से अलग करना चाहती है.”

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