रानी वेलु नचियार की जयंती आज, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन और पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Rani Velu Nachiyar: भारत की प्रारंभिक महिला स्वतंत्रता सेनानियों में से एक रानी वेलु नचियार की आज जयंती है. इस खास मौके पर देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. साथ ही अच्छे शासन और सांस्कृतिक गर्व के लिए उन्‍होंने उनकी प्रतिबद्धता की सराहना भी की.

उपराष्ट्रपति ने अर्पित की श्रद्धांजलि

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि “महिलाओं की ताकत और नेतृत्व की एक अमर प्रतीक वीरामंगई रानी वेलु नचियार की जयंती पर मैं भारत की प्रारंभिक महिला स्वतंत्रता सेनानियों में से एक को अपनी श्रद्धांजलि देता हूं. एक बहादुर शासक और दूरदर्शी नेता के रूप में वह औपनिवेशिक शासन के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहीं और साहस, रणनीतिक समझ व असाधारण नेतृत्व का उदाहरण पेश किया. उनकी अमिट विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती है, खासकर महिलाओं को, साहस, गरिमा और देशभक्ति की भावना को मजबूत करके जो आज देश का मार्गदर्शन करती है.”

रानी वेलु नचियार की सांस्कृतिक गर्व के लिए प्रतिबद्धता काबिले तारिफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रानी वेलु नचियार को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि “उन्हें भारत की प्रारंभिक बहादुर योद्धाओं में से एक के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने अदम्य साहस और अद्वितीय रणनीतिक कौशल का परिचय दिया. वह औपनिवेशिक दमन के खिलाफ उठीं और भारतीयों के खुद पर राज करने के अधिकार पर जोर दिया. अच्छे शासन और सांस्कृतिक गर्व के लिए उनकी प्रतिबद्धता भी तारीफ के काबिल है. उनका त्याग और दूरदर्शी नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा.”

तमिलनाडु में शिवगंगई रियासत की रानी थीं वेलु नचियार

बता दें कि 3 जनवरी 1730 को जन्मी वेलु नचियार 18वीं शताब्दी के दौरान वर्तमान तमिलनाडु में शिवगंगई रियासत की रानी थीं. रानी वेलु नचियार युद्ध कलाओं और तीरंदाजी में प्रशिक्षित थीं. उन्हें फ्रांसीसी, उर्दू और अंग्रेजी समेत कई भाषाओं में भी निपुणता हासिल थी.

रानी वेलु नचियार को ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली पहली रानी के रूप में जाना जाता है. 1780 में रानी वेलु नचियार अंग्रेजों से निडर होकर लड़ीं और उन्हें परास्त किया. तमिलनाडु के लोग आज भी उन्हें वीरमंगई यानी बहादुर रानी के नाम से जानते हैं.

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