महंगे LPG सिलेंडर के बीच किसानों के लिए कमाई का जरिया बनी सरसों की धांसे, ईंधन के रूप में बढ़ी मांग

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

एक समय ऐसा था जब सरसों की फसल के बाद खेतों में बची धांसे बेकार समझकर छोड़ दी जाती थीं. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. बढ़ती LPG कीमतों और गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण यही धांसे अब ग्रामीण इलाकों में कीमती ईंधन बन गई हैं. कई किसान अब इन धांसों को फेंकने के बजाय इकट्ठा कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. इतना ही नहीं, कुछ किसान तो धांसों के बदले सरसों की कटाई करवाने तक लगे हैं.

किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन

किसान राजेंद्र सिंह, सूबे सिंह, अजीत कुमार, कृष्ण कुमार, गजराज सिंह, योगेश कुमार, महेंद्र और महिपाल का कहना है कि सरसों की धांसे अब किसानों के लिए अतिरिक्त आय का साधन बनती जा रही हैं. उनके मुताबिक गरीब और ग्रामीण परिवार, जो अब भी चूल्हे पर खाना बनाते हैं, उनके लिए ये धांसे किसी वरदान से कम नहीं हैं.

चूल्हे के ईंधन के रूप में हो रहा इस्तेमाल

फसल कटाई के समय किसान सरसों के पौधों की धांसों को उखाड़कर इकट्ठा कर लेते हैं. इसके बाद इन्हें सूखाकर घरों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.

कुछ किसान इनका उपयोग पशुओं के लिए चारा पकाने में भी करते हैं. कई परिवार इन्हें अपने घर के आंगन में जमा करके महीनों तक चूल्हे के लिए इस्तेमाल करते हैं.

गैस सिलेंडर महंगे होने से बढ़ी मांग

ग्रामीण इलाकों में घरेलू गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमत और कभी-कभी होने वाली किल्लत के कारण इन धांसों की मांग तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि किसान अब इन्हें बेकार नहीं छोड़ रहे बल्कि संभालकर रख रहे हैं.

हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि इनका इस्तेमाल करने से प्रदूषण भी होता है, लेकिन आर्थिक मजबूरी के कारण कई परिवार इन्हें ईंधन के विकल्प के रूप में अपनाने लगे हैं.

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