बच्चों के लिए 2 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल बेहद खतरनाक, बढा रहा डिप्रेशन और मानसिक बीमारी

Social Media Addiction: जो बच्चे और युवा रोजाना 2 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, उनमें मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. इनमें Instagram, TikTok, YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स शामिल है. ऐसे बच्चों में डिप्रेशन, चिंता, खराब मानसिक स्थिति और आत्म-नुकसान जैसे जोखिम अधिक देखे गए हैं. यह खुलासा ऑस्ट्रेलिया में हुई एक नई रिसर्च में हुआ है.

12 से 18 वर्ष की उम्र तक लगातार अनुसरण

यह अध्ययन मेलबर्न के 1,195 छात्रों पर किया गया, जिनका 12 से 18 वर्ष की उम्र तक लगातार अनुसरण किया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि 12 से 13 साल की उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया का नकारात्मक प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ता है. लड़के और लड़कियां दोनों ही इस आयु वर्ग में अधिक सेंसेटिव पाए गए. रिसर्च के अनुसार, 12-13 साल की लड़कियों में रोजाना 2 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया उपयोग करने पर प्रति 100 किशोरियों में लगभग 11 अतिरिक्त मामलों में गंभीर अवसाद के लक्षण देखे गए.

बड़ी आबादी पर असर महत्वपूर्ण

हालांकि प्रभाव का स्तर बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन बड़ी आबादी पर इसका असर महत्वपूर्ण माना गया है. ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का कानून बनाया है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह कदम छोटे किशोरों के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन केवल उम्र आधारित प्रतिबंध से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी. विशेषज्ञों ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के ऐसे एल्गोरिदम और फीचर्स पर नियंत्रण जरूरी है, जो बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन से जोड़े रखते हैं या उन्हें हानिकारक कंटेंट दिखाते हैं.

शिक्षा को बढ़ावा देने की भी जरूरत

साथ ही स्कूलों में डिजिटल साक्षरता और ऑनलाइन सुरक्षा की शिक्षा को बढ़ावा देने की भी जरूरत है. 2,000 से अधिक ऑस्ट्रेलियाई अभिभावकों पर किए गए एक सर्वे में 59% माता-पिता ने कहा कि नए कानून से उन्हें बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर नियम लागू करने में मदद मिली है. वहीं 39% अभिभावकों का मानना है कि बच्चों को 16 वर्ष की उम्र से पहले सोशल मीडिया अकाउंट नहीं मिलना चाहिए.

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