Deendayal Upadhyaya Jayanti: पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धापूर्वक याद किया. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर उनके राष्ट्रसेवा से जुड़े योगदान और अंत्योदय की विचारधारा का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि समाज में सबसे पीछे खड़े व्यक्ति के जीवन में सुधार लाना ही वास्तविक राष्ट्र निर्माण की दिशा है. पीएम मोदी ने अपने संदेश में दीनदयाल उपाध्याय को राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व बताया. उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा में समाज के उस व्यक्ति को सबसे अधिक महत्व दिया गया, जिसे विकास और कल्याण की सबसे ज्यादा जरूरत है. प्रधानमंत्री ने लोगों से उनके विचारों और आदर्शों को जीवन में अपनाने के साथ सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों को निभाने का संकल्प लेने की अपील भी की.
राष्ट्रसेवा के सच्चे साधक पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को उनकी जयंती पर सादर नमन। उन्होंने समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान को राष्ट्र निर्माण का आधार माना और अंत्योदय की एक ऐसी विचारधारा दी, जिससे आज भी जनकल्याण की अद्भुत प्रेरणा मिलती है। आइए, इस विशेष अवसर पर उनके… pic.twitter.com/evr9ghWWe9
— Narendra Modi (@narendramodi) September 25, 2026
पीएम मोदी ने पोस्ट के साथ साझा किया संस्कृत श्लोक
जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत श्लोक भी सोशल मीडिया पर साझा किया. इस श्लोक का मूल संदेश व्यक्ति के पुरुषार्थ और लगातार किए जाने वाले प्रयास से जुड़ा है. इसका भाव यह है कि इंसान जितना अधिक प्रयास करता है, सफलता उसके उतनी ही जल्दी करीब आती है. संदेश में मेहनत, साहस और नए विचारों को केवल सोच तक सीमित न रखकर उन्हें काम में उतारने के महत्व पर जोर दिया गया है. बताया गया है कि प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया यह श्लोक योगवासिष्ठ से लिया गया है. योगवासिष्ठ को अद्वैत वेदांत की प्रमुख कृतियों में शामिल माना जाता है. इसमें आत्मज्ञान के साथ जीवन, कर्म और मोक्ष जैसे विषयों पर भी विस्तार से विचार किया गया है.
जयंती से एक दिन पहले भी साझा किया था सुभाषित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीनदयाल उपाध्याय की जयंती से एक दिन पहले भी संस्कृत का एक सुभाषित साझा किया था. इसमें व्यक्ति की वाणी को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है. सुभाषित में ऐसी बात कहने पर जोर है, जो सत्य होने के साथ प्रिय और दूसरों के लिए हितकारी भी हो. इसके साथ स्वाध्याय और चिंतन को भी अहम बताया गया है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के प्रमुख संस्थापक नेताओं में शामिल रहे. उनकी विचारधारा में समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और कल्याण का लाभ पहुंचाने को विशेष महत्व दिया गया था.
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