Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु मां की आराधना कर ज्ञान, बुद्धि और संतान सुख की कामना करते हैं.
वाराणसी में बागेश्वरी रूप में विराजमान मां
धार्मिक नगरी वाराणसी में मां स्कंदमाता बागेश्वरी देवी के रूप में विराजमान हैं. यहां स्थित बागेश्वरी देवी का प्राचीन मंदिर सदियों से भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. नवरात्र के पांचवें दिन तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. रात से ही भक्तों का आना शुरू हो जाता है और पूरे दिन दर्शन का सिलसिला जारी रहता है.
विद्या की देवी के रूप में होती है पूजा
मां स्कंदमाता के इस स्वरूप को विद्या की देवी माना जाता है. यही कारण है कि यहां छात्रों और युवाओं की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ती है, जो मां से शिक्षा, सफलता और उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद मांगते हैं.
नारियल और अड़हुल चढ़ाने की परंपरा
मंदिर में मां को नारियल चढ़ाने का विशेष महत्व है. इसके साथ ही श्रद्धालु चुनरी, लाल अड़हुल (गुड़हल) के फूलों की माला और मिष्ठान अर्पित करते हैं. मान्यता है कि मां अपने भक्तों को सद्बुद्धि और विद्या के अनुरूप आशीर्वाद प्रदान करती हैं.
सदियों पुराना आस्था का केंद्र
वाराणसी का यह स्कंदमाता बागेश्वरी मंदिर सैकड़ों वर्षों से श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बना हुआ है. विशेष रूप से नवरात्र के दौरान यहां दर्शन और पूजन का महत्व और भी बढ़ जाता है. भक्त मां के दरबार में अपनी मनोकामनाएं रखते हैं—कोई विद्या की कामना करता है तो कोई नौकरी और जीवन में सफलता की.
क्या बोले महंत और श्रद्धालु
बागेश्वरी देवी मंदिर के महंत कृष्णा मिश्रा ने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन मां स्कंदमाता के दर्शन का विशेष महत्व होता है. उन्होंने कहा कि यहां मां बागेश्वरी के रूप में विराजमान हैं और बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. श्रद्धालु मां को नारियल, चुनरी और अड़हुल के फूल अर्पित कर ज्ञान और सद्बुद्धि की कामना करते हैं.
वहीं श्रद्धालु अमर कुमार ने बताया कि वे हर साल नवरात्र के दौरान मां के दर्शन करने आते हैं. उन्होंने कहा कि मां के दरबार में आकर उन्हें शांति मिलती है और वे अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा बच्चों की पढ़ाई के लिए आशीर्वाद मांगते हैं.
भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता
नवरात्र के इन पावन दिनों में भक्त मां स्कंदमाता के दर्शन कर अपनी इच्छाएं प्रकट करते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना को मां अवश्य स्वीकार करती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.

