BLF 2026: विश्व पुस्तक मेला 2026 का आयोजन दिल्ली के प्रगति मैदान में हो रहा है. यहां भारत लिटरेचर फेस्टिवल (बीएलएफ) के छठे सीजन में भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क के चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर एवं एडिटर-इन-चीफ (CMD) उपेन्द्र राय ने युवा लेखकों को संबोधित किया. CMD उपेन्द्र राय ने ‘राष्ट्र निर्माण में युवा लेखकों की भूमिका’ पर अपने विचार रखे. उन्होंने पीएम-युवा स्कीम के तहत चुने गए युवा लेखकों से बात की. इस दौरान उन्होंने बच्चों के गुणों, अहंकार, आत्मा, स्वतंत्रता और आधुनिक जीवन मूल्यों पर गहराई से चर्चा की. उन्होंने बुद्ध, महावीर और कबीर जैसे महापुरुषों का उदाहरण देकर युवाओं को प्रेरित किया.
आज World Book Fair 2026 में भारत लिटरेचर फेस्टिवल के मंच पर राष्ट्र निर्माण में युवा लेखकों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए. इस समागम में देश-विदेश से आए लोगों के साथ-साथ PM-YUVA स्कीम में चुने गए युवा में मौजूद रहे।#WorldBookFair2026 #IndianIntellectInInk… pic.twitter.com/ZZ1rxQFede
— Upendrra Rai (@UpendrraRai) January 10, 2026
बच्चों में पाए जाने वाले दो मुख्य गुण
CMD उपेन्द्र राय ने अपनी स्पीच की शुरुआत बच्चों के स्वभाव से की. उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी पैदा हुआ कोई भी बच्चा दो मुख्य गुण रखता है. पहला गुण यह है कि बच्चा बिना किसी काम के व्यस्त रहता है. दूसरा गुण यह है कि वह बिना किसी वजह के खुश रहता है. उसे खुश रखने के लिए कोई खास आयोजन नहीं करना पड़ता. लेकिन आजकल मां-बाप बच्चों को मोबाइल देना पड़ता है क्योंकि वे आदत डाल देते हैं. फिर भी बच्चे का स्वभाव सहज और सरल होता है. CMD उपेन्द्र राय ने बताया कि जब तक बच्चा सात साल से छोटा होता है, तब वह भूख लगने पर कहता है, ‘मां, बबलू को भूख लगी है, खाना दे दो.’ वह थर्ड पर्सन में बात करता है. लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, दस साल की उम्र पार करता है, तब कहता है, ‘मम्मी, मुझे खाना दो, मुझे भूख लगी है.’ इस तरह वह ‘मैं’ पर आ जाता है.
अहंकार का प्रवेश और समाज का बोझ
CMD उपेन्द्र राय ने आगे कहा कि बच्चा वही रहता है, लेकिन उसके अंदर अहंकार कब आ जाता है, हमें पता नहीं चलता. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बच्चे से बड़ा होने तक समाज की मर्यादाएं और कई चीजें उसके दिमाग पर गहरा बोझ डाल देती हैं. जाने-अनजाने में ये चीजें हमारे मन पर असर करती हैं. उन्होंने जोर दिया कि हमें यह समझना चाहिए कि अहंकार हमें कैसे बदल देता है. यह बोझ हमें सहज रहने नहीं देता. CMD उपेन्द्र राय की यह बात युवा लेखकों को सोचने पर मजबूर करती है कि कैसे हम अपनी सरलता खो देते हैं.

जुड़वा बच्चों का उदाहरण और आत्मा
CMD उपेन्द्र राय ने एक दिलचस्प उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि एक ही मां के गर्भ से दो जुड़वां बच्चे एक ही समय में पैदा होते हैं, लेकिन दोनों का स्वभाव बहुत अलग होता है. एक बच्चा बहुत काबिल बन जाता है, जबकि दूसरा नालायक हो जाता है. ऐसा कैसे होता है. CMD उपेन्द्र राय ने बताया कि दस-बारह साल की उम्र के बाद हमें फिजियोलॉजी और बायोलॉजी की समझ आ जाती है. मां-बाप बच्चे पैदा करने का अवसर बनाते हैं, लेकिन आत्मा का प्रवेश कौन करता है, यह कोई वैज्ञानिक नहीं बता पाया. पूरी दुनिया में कोई मशीन नहीं बनी जो दाल-चावल को खून में बदल सके. उन्होंने कहा कि जुड़वा बच्चों में अलग-अलग संस्कारों वाली आत्माएं प्रवेश करती हैं, जिससे उनका स्वभाव अलग हो जाता है.
कर्मों की छाप और आत्मा पर असर
CMD उपेन्द्र राय ने बताया कि हम जो काम करते हैं, अच्छा या बुरा, उसका रिजल्ट हमारी आत्मा पर छाप छोड़ता है. एक-एक लाइन रजिस्टर होती जाती है. इसी वजह से दो बच्चे अलग दिशा में चले जाते हैं. उन्होंने कहा कि इस पर बड़ा शोध हुआ है और दुनिया के मनोवैज्ञानिक इस पर सहमत हैं. यह बात थोड़ी आध्यात्मिक है, थोड़ी प्रैक्टिकल भी. CMD उपेन्द्र राय की यह व्याख्या युवाओं को कर्मों के महत्व को समझाती है.

बुद्ध का वादा और महात्माओं का जन्म
CMD उपेन्द्र राय ने महात्मा बुद्ध का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि जब बुद्ध अंतिम सांस लेने लगे, तो उन्होंने कहा कि मैं इस पृथ्वी पर फिर आऊंगा और मेरा नाम मैत्रेय होगा. लेकिन बुद्ध को मरे साढ़े तीन हजार साल हो गए, अभी तक मैत्रेय नाम का कोई नहीं आया. इसका कारण यह है कि बुद्ध जैसी महान आत्मा को धारण करने वाला गर्भ नहीं मिला. अगर मिलता, तो बुद्ध की बात पर कोई संदेह नहीं करता. CMD उपेन्द्र राय ने कहा कि दुनिया के बड़े विद्वान और विचारक जीवन के सबसे बड़े मूल्य को स्वतंत्रता मानते हैं.
जीवन का सबसे बड़ा मूल्य: स्वतंत्रता
CMD उपेन्द्र राय ने जोर देकर कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में जीवन का सबसे बड़ा मूल्य स्वतंत्रता है. अगर आपको अपनी बात रखने की आजादी मिलती है, जीवन जीने की आजादी मिलती है, कुछ नया बनाने की आजादी मिलती है, तो आप आधुनिक जीवन मूल्यों की तरफ बढ़ते हैं. उन्होंने कहा कि अपनी चेतना से जितना देख पाते हैं, उससे आगे देखने की खोज में यात्रा करें. अगर ऐसी आजादी मिलती है, तो आप सफल होते हैं. यह बात युवा लेखकों के लिए बहुत प्रेरणादायक है, क्योंकि लेखन में स्वतंत्रता जरूरी है.
शेर का उदाहरण और सपूत की बात
CMD उपेन्द्र राय ने शेर का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि शेर जब शिकार के लिए दौड़ता है, तो रास्ते की कटीली झाड़ियों को नहीं देखता. उसका शरीर चोटिल हो जाता है, लेकिन वह रास्ता नहीं बदलता. इसी तरह सपूत के बारे में कहा जाता है कि अगर बेटा नालायक हो, तो कितना भी धन संचय करो, वह सब नष्ट कर देगा. लेकिन सपूत हो, तो धन संचय की जरूरत नहीं, वह खुद धन का अंबार लगा देगा. CMD उपेन्द्र राय ने कहा कि आधुनिक मूल्यों पर बात इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि रटी-रटाई बातें, मर्यादाएं और संस्कार हमें इतना बोझिल बनाते हैं कि आत्मा मर जाती है.
बुद्ध और महावीर की क्रांतिकारी सोच
CMD उपेन्द्र राय ने बुद्ध को पढ़कर महसूस किया कि वे कितने क्रांतिकारी थे. महावीर के बारे में कहा कि उनके मन में बचपन से सन्यास था, लेकिन बड़े भाई ने रोक लिया. छह साल बाद भाई ने अनुमति दी, तो महावीर घर छोड़कर निकल गए. महावीर राजा के बेटे थे, उनके पिता के पास अपार दौलत थी. CMD उपेन्द्र राय ने कहा कि महावीर और बुद्ध जैसे लोग राजसी जीवन छोड़कर आध्यात्मिक रास्ते पर चले.
कबीर का जीवन और दौलत की सच्चाई
CMD उपेन्द्र राय ने कबीर का जिक्र किया. कबीर ने कपड़ा बुनकर जीवन चलाया, उनके पास कोई जमा पूंजी नहीं थी. लेकिन उन्हें पता था कि जमा पूंजी में कोई बड़ा काम नहीं. उन्होंने कहा कि अगर 10 महापुरुषों का नाम लेना हो, तो आसानी से ले लेंगे. लेकिन 50 साल पहले के 10 अरबपतियों का नाम याद नहीं आएगा. CMD उपेन्द्र राय ने तराजू का उदाहरण दिया. एक पलड़े में महावीर, बुद्ध, कबीर और मीरा, दूसरे में दुनिया की सारी दौलत. वे खुद बुद्ध और महावीर के पैर पकड़ेंगे, क्योंकि दौलत बाय-प्रोडक्ट है. कोई भी बना सकता है, लेकिन ऐसे महापुरुष हजारों साल में एक आते हैं.
सफलता के लिए सहजता अपनाएं
CMD उपेन्द्र राय ने सफलता के मंत्र दिए. उन्होंने कहा कि सहजता से जीवन आसान होता है, कुटिलता अवसर छीन लेती है. एक कहानी सुनाई कि एक साहूकार ने पत्थर बेचने वाले से हीरा खरीदने की कोशिश की, लेकिन ज्यादा होशियारी में अवसर गंवा दिया. CMD उपेन्द्र राय ने युवाओं को सलाह दी कि बच्चे जैसी सरलता अपनाएं.
पीएम-युवा स्कीम के युवा लेखकों से संवाद
CMD उपेन्द्र राय ने पीएम-युवा स्कीम के युवा लेखकों से बात की. उन्होंने राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर जोर दिया. देश-विदेश से आए लोग इस कार्यक्रम में मौजूद थे. CMD उपेन्द्र राय कई सालों से बीएलएफ में सक्रिय हैं और साहित्य को बढ़ावा देते हैं. उनकी स्पीच ने युवाओं को प्रेरित किया कि आधुनिक मूल्यों में स्वतंत्रता और आध्यात्मिक सोच को अपनाएं.
18 जनवरी तक चलेगा विश्व पुस्तक मेला
विश्व पुस्तक मेले में भारत लिटरेचर फेस्टिवल (बीएलएफ) का छठा सीजन भारत एक्सप्रेस द्वारा ही आयोजित किया जा रहा है. विश्व पुस्तक मेला 10 से 18 जनवरी तक चलेगा. CMD उपेन्द्र राय की स्पीच का वीडियो भारत एक्सप्रेस के एक्स हैंडल पर लाइव देखा गया. उनके विचारों ने साहित्य प्रेमियों को खासा प्रभावित किया. उन्होंने कहा कि अगर जीवन का मूल्य दौलत बना लिया, तो बुद्ध-महावीर से महरूम हो जाएंगे.
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