सफर के दौरान ही रुक गई थी पति की सांसे, पत्नी को लगा गहरी नींद में सो रहे हैं पति, 13 घंटे लाश के साथ करती रही सफर

Abhinav Tripathi
Sub Editor, The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Man Dies During Train Journey: अहमदाबाद से अयोध्या जा रही साबरमति एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में अपने पति रामकुमार के साथ जा रही महिला ने पति के शव के साथ 13 घंटों से अधिक की यात्रा की. खास बात ये रही कि कोच में बैठे किसी भी यात्री को इस बात की भनक नहीं लगी. दरअसल, महिला को पता ही नहीं चला कि कब उसके पति ने दम तोड़ दिया. 13 घंटें बाद जब ट्रेन झांसी पहुंची उसके बाद शव को जीआरपी की मदद से नीचे उतारा गया और जीआरपी ने जांच शुरू की.

जानकारी के अनुसार मृतक अपनी पत्नी, बच्चों और अपने एक मित्र के साथ सूरत से अयोध्या जा रहा था. वह मूल रूप से अयोध्या के इनायत नगर स्थित मजलाई गांव का निवासी था. पति रामकुमार अपनी पत्नी के साथ रात में सोया, इसके बाद सुबह 8 बजे तक उठा ही नहीं.

जानिए पूरा मामला

आपको बता दें कि साबरमती एक्सप्रेस के स्लीपर कोच क्रमांक एस 6 की सीट नंबर 43, 44, 45 पर राजकुमार अपनी पत्नी, दो बच्चों और मित्र सुरेश यादव के साथ यात्रा कर रहे थे. सूरत से चलकर सभी को अयोध्या पहुंचना था. अपनी यात्रा के दौरान वह देर रात सो गए. सुबह 8 बजे जब उनको जगाने की कोशिश की गई तो वह नहीं जगे. मृतक के दोस्त सुरेश ने बताया कि इस बात की जानकारी जगाने के दौरान उनको हो गई थी.

अब यात्रा के दौरान बच्चे थे और पत्नी थी, इस वजह से जानकारी किसी को नहीं दी गई. जब ट्रेन रात के 8 बजे के आसपास झांसी के विरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन पर पहुंची तब जाकर जीआरपी की मदद से मृतक के शव को नीचे उतारा गया. बाद में शव का पंचनामा किया गया. इसके बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

मृतक की पत्नी ने क्या बताया?

मृतक राजकुामार की पत्नी ने कहा कि सुबह 8 बजे जब मैं उनको उठा रही थी तो वह कुछ बोले नहीं, शरीर गर्म था, इस वजह से कुछ समझ भी नहीं आया. कई बार उठाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं उठे. सभी को लगा कि तबीयत खराब होने के कारण वह सो रहे हैं, लेकिन वह हमेशा के लिए सो गए.

साथ में यात्रा कर रहे मृतक के साथी सुरेश का कहना है कि साबरमती एक्सप्रेस से हम आ रहे थे, राजकुमार भाई पिछले समय से बीमार थे. वह सूरत में गाड़ी चलाने का काम करते थे. हाल ही में उनका एक्सीडेंट हो गया था. वहां पर वह ठीक नहीं हो पाए, इस वजह से इलाज के लिए हम उनको फैजाबाद ले जा रहे थे. रास्ते में बातचीत करते हुए वह सो गए. कहां पर उनकी मृत्यु हो गई पता नहीं चला. रास्ते में डर के मारे किसी को नहीं बताया.

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