Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सभी में एक ही परमात्मा निवास करते हैं, ऐसा समझकर व्यवहार करने से वह व्यवहार भी भक्ति बन जाता है। व्यवहार और भक्ति को अलग-अलग मत मानो। जब तक...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, रात्रि को बारह बजे मन्दिर में जाने पर यदि ठाकुर जी शयन कर गए हों तो बिना दर्शन किए लौटना पड़ता है। परन्तु यदि हम परोक्ष दर्शन की पराकाष्ठा...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, उपदेश देते समय उपदेशक को इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि मैं जो बोलता हूँ, वह क्या मेरे जीवन में पूरी तरह से उतर चुका है ?...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रत्यक्ष दर्शन के विषय में गोपिकायें इतनी अधिक आगे बढ़ गई थीं कि श्रीकृष्ण के ध्यान में वे स्वयं स्त्रियां हैं - यह भी भूल जाती थीं। वे भावमग्न...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्री जामवंत जी की आज्ञा से भगवान के समस्त सैनिक पत्थर शिला लाकर देते हैं, नल-नील उस पर भगवान का नाम, राम नाम लिखते हैं और पत्थर तैरने लगता...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीरामचरितमानस में प्रभु श्रीराम ने नवधाभक्ति का उपदेश शबरी माँ के सनमुख किया। ईश्वर को पाने के ये नव रास्ते हैं। शबरी माँ ने इसी मार्ग से ईश्वर को पाया।...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, महाराज दशरथ भगवान का राज्याभिषेक करना चाहते थे। उन्होंने गुरुदेव वशिष्ठ से कहा- (भये राम सब विधि सब लायक।) मेरी वृद्धावस्था है। मैं राम जी को गादी देना चाहता...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, नगर दर्शन लीला में पूरे समय भगवान श्री राम के साथ जनकपुर के बच्चे रहे। भगवान के समीप रहने के लिए जीवन में बच्चों जैसी सरलता होना आवश्यक है।...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, भगवान श्री राम की बाललीला में जातकर्म संस्कार, नामकरण संस्कार, गृहनिष्कर्मण संस्कार, अन्नप्राशन संस्कार, चूड़ाकरण संस्कार, यज्ञोपवीत संस्कार, विद्या अध्ययन संस्कार का वर्णन किया गया। भारतीय संस्कृति में सोलह...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सगुनहिं अगुनहिं नहिं कछु भेदा। गावहिं मुनि पुरान बुद्ध वेदा ।। अगुन अरूप अलख अज जोई। भगत प्रेम बस सगुन सो होई ।। भगवान के अवतार का मुख्य कारण...