Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रभु-प्रेम के बिना ज्ञान शोभा नहीं देता।ब्रह्मज्ञानी को ब्रह्मप्रेमी बनना पड़ता है।जहाँ कथा-कीर्तन आदि होते हैं, वहाँ प्रभु गुप्त रूप से आते हैं, क्योंकि प्रभु को तो पर्दे के...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, श्रीमद्भागवतमहापुराण में पुरंजन की कथा आती है। पुरंजन का अविज्ञात नामक एक मित्र था। वह हमेशा उसकी गुप्त रूप से मदद करता था। यह पुरंजन अर्थात् जीवात्मा और अविज्ञात...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, प्रत्येक गांव में संत और सती आवश्यक होते हैं। वह न हों तो गांव का मंगल नहीं होगा। किन्तु संत का मिलन बहुत दुर्लभ है, क्योंकि संत को पहचानना...
Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, सांसारिक कार्य करते समय हम भगवान को न भूल जाएँ- इस बात का हमेशा ख्याल रखें। हिरण्याक्ष का अर्थ है - सुवर्ण पर नजर रखने वाला लोभी आदमी। आंखों...