फेसबुक वाली कंपनी META पर संकट, एक ओर भारत सरकार से मांगना पड़ी माफी, तो दूसरी ओर कोर्ट ने लगाया ₹5404 करोड़ का जुर्माना

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
META News: इस समय फेसबुक वाली कंपनी मेटा के अच्छे दिन नहीं चल रहे हैं, उसे बार-बार झटके पर लग रहे हैं. ऐसे में कभी उसे भारत सरकार से माफी मांगनी पड़ रही है तो कभी जुर्माना झेल पड़ रहा है. जी हां, दरअसल, सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा पर मैक्सिको कोर्ट ने 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया है. न्यू मैक्सिको की अदालत ने बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने के लिए मेटा पर यह जुर्माना लगाया है. यह राशि राज्य के उस फंड में जाएगी, जिसका इस्तेमाल किशोरों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए किया जाएगा.
समाचार एजेंसी के मुताबिक, कोर्ट ने फेसबुक-व्हाट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा को टीनएजर्स की मेंटल हेल्थ को नुसकान पहुंचाने के लिए $567 मिलियन देने का आदेश दिया. अगर रुपए में बात करें तो यह जुर्माना 54,04,19,89,050 रुपए होगा. यानी 54,04 करोड़ रुपए. अदालत ने गुरुवार को मेटा को आदेश दिया कि वह अपने प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने वाले टीनएजर्स की मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए राज्य के फंड में $567 मिलियन जमा कर.

क्यों मेटा पर लगा जुर्माना?

दरअसल, सांता फे में न्यू मैक्सिको की फर्स्ट ज्यूडिशियल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का यह फैसला एक ट्रायल के बाद आया है, जिसमें राज्य की जूरी ने कंपनी पर अपने प्रोडक्ट्स के कारण टीनएजर्स की मेंटल हेल्थ समस्याओं और यौन शोषण के आरोपों के लिए $375 मिलियन का जुर्माना लगाया था.

भारत में भी मेटा संकट में

इस बीच मेटा कंपनी भारत में भी मुसीबतों में फंसी है. पीएम मोदी का वीडियो विवाद और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट को लेकर मेटा पर सरकार की सख्ती जारी है. लगातार दो दिनों से मेटा को सरकार के सामने हाजिरी लगानी पड़ रही है. जी हां, भारत सरकार और मेटा के बीच दूसरे दिन भी अहम बैठक हुई. सूत्रों के मुताबिक बैठक में डीपफेक, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट और AI से बने कंटेंट पर सबसे ज्यादा बात हुई.

मेटा ने भारत को दिया भरोसा

हालांकि सरकार के सामने फेसबुक वाली कंपनी मेटा ने भरोसा दिया है कि वह ऐसे कंटेंट पर पहले से ज्यादा सख्ती करेगा. कंपनी ने कहा कि कंटेंट की पहचान, निगरानी और उसे जल्दी हटाने के लिए अपने सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा. वहीं, सरकार ने साफ कर दिया कि सिर्फ भरोसा नहीं नतीजे भी दिखने चाहिए. मेटा के उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी और देखा जाएगा कि वे कितने असरदार हैं.
सूत्रों के मुताबिक, सरकार 3 घंटे के भीतर आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की समय-सीमा पर अपने रुख से पीछे नहीं हटी है. यह नियम CSAM, डीपफेक, AI से बने भ्रामक कंटेंट समेत दूसरे गंभीर मामलों पर भी लागू होगा. सरकार का कहना है कि ऐसे कंटेंट पर जितनी जल्दी कार्रवाई होगी लोगों को होने वाला नुकसान उतना ही कम होगा.
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